बालाघाट: तीन आदिवासी गाँवों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण पूरा, 3800 लोगों की जाँच, कांग्रेस ने मौतों का आँकड़ा छिपाने का आरोप लगाया
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा-बहुल आदिवासी गाँवों में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर जाँच अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन प्रभावि…
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा-बहुल आदिवासी गाँवों में बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर जाँच अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन प्रभावित गाँवों में 3,811 लोगों का घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया, जिसमें मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों के लगभग 800 मामले सामने आए। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने का आरोप लगाते हुए इस मामले पर सवाल उठाए हैं।
स्वास्थ्य टीमों ने बिरसा ब्लॉक के कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी गाँवों में यह सर्वेक्षण किया। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, रविवार तक कुल 798 लोग बीमार पाए गए। इनमें सबसे ज़्यादा 320 मामले मलेरिया के थे, जबकि 155 लोग दस्त, 177 त्वचा रोगों और 146 लोग चकत्तों के साथ बुखार से पीड़ित थे।
बीमारों का इलाज और स्वास्थ्य स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि कुल पाए गए 798 मरीजों में से 569 का इलाज उनके घरों पर ही किया गया। वहीं, 229 लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत पड़ी। इनमें से 201 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं और 28 का इलाज अभी भी जारी है। एक अधिकारी ने कहा, "अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया था और उनकी हालत स्थिर है तथा वे खतरे से बाहर हैं।" रविवार को 12 नए मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि 5 को छुट्टी दी गई।
मौतों पर राजनीतिक विवाद
इस पूरे मामले ने एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की है। हालाँकि, कांग्रेस का दावा है कि यह आँकड़ा कहीं ज़्यादा है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पिछले हफ़्ते आरोप लगाया था कि 19 बच्चों की मौत हुई है और सरकार तथ्यों को दबा रही है।
बीमारी का कारण अभी अज्ञात
अभी तक इन बीमारियों का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मरीज़ों में मलेरिया जैसे बुखार, त्वचा संक्रमण और कुपोषण से जुड़े लक्षण देखे गए हैं। स्थिति का सही पता लगाने के लिए खून और पानी के नमूने आगे की जाँच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तीनों गाँवों में स्वास्थ्य निगरानी और इलाज का काम लगातार जारी रहेगा।
इनपुट: IANS



