10 साल में UPI ने बदली भारत की तस्वीर, अब दुनिया के 11 देशों में पहुंचा डिजिटल पेमेंट का यह सिस्टम
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI), ने अपने संचालन के 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया'…
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI), ने अपने संचालन के 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन की एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, UPI अब भारत की सीमाओं से निकलकर वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बना रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दी गई जानकारी के मुताबिक, UPI अब फ्रांस, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ग्रीस और मॉरीशस समेत दुनिया के 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है। इससे न केवल भारत में भुगतान आसान हुआ है, बल्कि यह विदेशों में भी डिजिटल लेनदेन को संभव बनाकर भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को दुनिया तक पहुंचा रहा है।
मंत्रियों ने बताया क्रांतिकारी कदम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने UPI को इनोवेशन के जरिए भारत को बदलने के पीएम मोदी के दृष्टिकोण का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इन 10 वर्षों में भारत ने दुनिया को सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम दिया है, जो लोगों को तेज, आसान और सुरक्षित इंटरफेस के माध्यम से सशक्त बनाता है।
इसी तरह, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे पीएम मोदी की सोच से शुरू हुई एक क्रांति कहा। उन्होंने आम बोलचाल में "क्यूआर कोड प्लीज?" जैसे वाक्यों के शामिल होने का जिक्र करते हुए कहा कि यह करोड़ों भारतीयों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री के नेतृत्व को देते हुए कहा कि UPI ने लाखों भारतीयों को वित्तीय भागीदारी के एक नए दौर में शामिल किया है।
लेनदेन में 13,000 गुना की वृद्धि
UPI की सफलता का अंदाजा इसके आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में UPI पर होने वाले वार्षिक लेनदेन की संख्या में 13,000 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यह संख्या केवल 1.78 करोड़ थी, वहीं वित्त वर्ष 2023-24 तक यह बढ़कर 13,115 करोड़ तक पहुंच गई।
इनपुट: IANS



