भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जापान में गिनाए अवसर
भारत ने 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष…
भारत ने 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को टोक्यो में यह बात कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वे जापान के शीर्ष वित्तीय और निवेश संस्थानों के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे। गोयल ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले साल 7.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर दर्ज की है।
इस उच्च-स्तरीय चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत में दीर्घकालिक पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना और दोनों देशों के बीच निवेश साझेदारी को और गहरा करना था। बैठक में एमयूएफजी, डेवलपमेंट बैंक ऑफ जापान (डीबीजे), मिजुहो, मॉर्गन स्टेनली, नोमुरा और निप्पॉन लाइफ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
निवेश के लिए आकर्षक क्षेत्र
पीयूष गोयल ने जापानी निवेशकों के लिए भारत में मौजूद महत्वपूर्ण अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे भविष्य के क्षेत्रों का जिक्र किया। गोयल ने कहा कि भारत की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता और राष्ट्रीय बिजली ग्रिड, ऊर्जा-गहन डिजिटल उद्योगों के विस्तार के लिए एक ठोस आधार प्रदान करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में नए अवसर पैदा कर रहा है।
मजबूत आर्थिक बुनियाद
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था की निरंतर वृद्धि के पीछे के प्रमुख कारकों को भी गिनाया। उन्होंने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, बैंकों की मजबूत पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy), गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) के निम्न स्तर, बढ़ते मध्यम वर्ग और लोगों की बढ़ती खर्च योग्य आय को प्रमुख वजह बताया। चर्चा के दौरान भारत के 'गिफ्ट सिटी' को अंतरराष्ट्रीय पूंजी के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी बात हुई, ताकि जापान और भारत के बीच निवेश का प्रवाह और सुगम हो सके।
यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत और जापान ने अगले दशक में भारत में जापानी निजी निवेश को 10 ट्रिलियन येन तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत अपनी वैश्विक विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और निवेश केंद्र बनने की यात्रा में जापान को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है।
इनपुट: IANS



