मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: मंत्री विजय शाह पर अभियोजन की मंजूरी पर मध्य प्रदेश कैबिनेट आज ले सकती है फैसला

मध्य प्रदेश सरकार के आदिवासी मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (केस चलाने) की मंजूरी पर आज मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में फैसला हो सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला…

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामला: मंत्री विजय शाह पर अभियोजन की मंजूरी पर मध्य प्रदेश कैबिनेट आज ले सकती है फैसला
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश सरकार के आदिवासी मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (केस चलाने) की मंजूरी पर आज मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में फैसला हो सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर उनकी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट भी राज्य सरकार को फटकार लगा चुका है।

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यदि कैबिनेट मंत्री के खिलाफ केस चलाने की अनुमति दे देती है, तो इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को होनी है, जिससे पहले सरकार पर फैसला लेने का दबाव है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला मई 2025 का है, जब मंत्री विजय शाह ने इंदौर के पास महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी उस समय पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में मीडिया को जानकारी दे रही थीं। शाह ने कथित तौर पर कहा था कि "उनके ही समुदाय की एक बहन को बदला लेने के लिए भेजा गया है।" इस बयान की व्याख्या कर्नल कुरैशी को आतंकवादियों के समुदाय से जोड़ने के रूप में की गई, जिसके बाद पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और SIT जांच

इस बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे "गटर की भाषा" करार दिया था और FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(ए) के तहत शाह पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी।

किसी मंत्री या सरकारी सेवक पर कार्रवाई के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है, और इसी प्रक्रिया में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कई बार फटकार भी लगाई। कोर्ट ने पहले 19 जनवरी को दो हफ्ते और फिर मई में चार हफ्ते का समय दिया था, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हालांकि, मंत्री कुंवर विजय शाह इस मामले में कई बार माफी मांग चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने यह टिप्पणी "देशभक्ति के जोश" में की थी और उनका इरादा सेना या किसी अधिकारी का अपमान करना नहीं था। सुप्रीम कोर्ट पहले उनकी माफी की मंशा पर भी सवाल उठा चुका है।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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