शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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नए आपराधिक कानूनों के अमल में हरियाणा देश भर में अव्वल, 100 में से 95.21 स्कोर के साथ बना नंबर-1

देश में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन में हरियाणा 100 में से 95.21 के स्कोर के साथ पहले स्थान पर है। हरियाणा पुलिस ने इस उपलब्धि का श्रेय आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, वैज्ञानिक जांच को ब

नए आपराधिक कानूनों के अमल में हरियाणा देश भर में अव्वल, 100 में से 95.21 स्कोर के साथ बना नंबर-1
(फोटो: IANS)

देश में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन में हरियाणा 100 में से 95.21 के स्कोर के साथ पहले स्थान पर है। हरियाणा पुलिस ने इस उपलब्धि का श्रेय आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, वैज्ञानिक जांच को बढ़ावा देने और पुलिसकर्मियों के व्यापक प्रशिक्षण को दिया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के नेतृत्व में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।

तकनीक और प्रशिक्षण से मिली सफलता

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा, "इन नए कानूनों का उद्देश्य केवल पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह लेना नहीं है, बल्कि देश में एक आधुनिक, तकनीक आधारित और नागरिकों के अनुकूल न्याय व्यवस्था विकसित करना है।" उन्होंने इस सफलता के पीछे पुलिस अधिकारियों की कड़ी मेहनत, सुनियोजित योजना और व्यापक प्रशिक्षण को मुख्य वजह बताया। सरकार ने प्रशासनिक सुधारों, पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने और सूचना व संचार तकनीक (ICT) के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने बताया कि सभी जांच अधिकारियों को नए कानूनों के तहत प्रशिक्षित कर उन्हें आईओ मोबाइल ऐप से जोड़ा गया है। इसके अलावा, मोबाइल फोरेंसिक यूनिट, ई-साक्ष्य प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक समन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं ने जांच और अदालती प्रक्रिया को अधिक कारगर बनाया है।

पारदर्शी और सुगम बनी न्याय प्रक्रिया

नए नियमों के तहत अब गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया गया है। डीजीपी के मुताबिक, अपराध स्थल पर मोबाइल फोरेंसिक टीमें तुरंत पहुंचकर डीएनए, फिंगरप्रिंट और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर लेती हैं, जिससे दोषियों को सजा दिलाने की दर बढ़ने की उम्मीद है।

इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अधिक महत्व, जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और गवाहों की सुरक्षा जैसे प्रावधानों से न्याय प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और सुलभ हो गई है।

डिजिटल पहल से करोड़ों की बचत

अजय सिंघल ने एक स्वतंत्र मूल्यांकन का हवाला देते हुए बताया कि हरियाणा की डिजिटल पहलों से मात्र छह महीनों में 26 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। ई-समन प्रणाली से कागज और ईंधन की खपत कम हुई है, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पुलिसकर्मियों का समय बचा है, जिससे वे जांच और जनसेवा पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका बढ़ेगी, जो सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण और फिंगरप्रिंट मिलान जैसे कार्यों को और तेज बनाएगी। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि इन कानूनों की पूरी सफलता पुलिस, न्यायपालिका, फोरेंसिक विशेषज्ञों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही संभव होगी।

इनपुट: IANS

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