महाराष्ट्र: 2.52 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने पर कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला, ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
महाराष्ट्र में मतदाता सूची से लगभग 2.52 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता भाई जगताप ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना…
महाराष्ट्र में मतदाता सूची से लगभग 2.52 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता भाई जगताप ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए उन पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जगताप ने इसे अलोकतांत्रिक कदम बताते हुए कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र में कुल साढ़े नौ करोड़ मतदाताओं में से 2.52 करोड़ वोटरों के नाम विभिन्न कारणों से काटे जा रहे हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 25-27 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, "जो गलत है उसे निकालिए, लेकिन जिस तरह से महाराष्ट्र में ये सरकार बनी है, वो वोट चोरी से बनी है।"
चुनाव आयुक्त पर निजी हमला
भाई जगताप ने ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखे शब्दों में हमला किया। उन्होंने कहा, "मैंने बहुत पहले कहा था कि ज्ञानेश कुमार देश के चुनाव आयोग के प्रमुख नहीं हैं, बल्कि सरकार के बंगले के बाहर गुलाम की तरह बैठकर काम करते हैं।" जगताप ने आरोप लगाया कि यह सब सिर्फ सरकार और भाजपा को खुश करने के लिए किया गया, ताकि रिटायरमेंट के बाद उन्हें कहीं समायोजित किया जा सके।
एसआईआर के तहत हुए चुनाव रद्द करने की मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की कि सघन सत्यापन और पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत हुए सभी चुनावों को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम पहले भी कह रहे थे और आज भी कह रहे हैं कि वो चुनाव लोकतांत्रिक ढांचे में नहीं बैठते। जिस तरह से आपने वोटरों से उनका वोटिंग का अधिकार छीन लिया है, वो गलत है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि आयोग के अपने ही कमिश्नर एसआईआर का विरोध कर रहे थे, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए यह कदम उठाया।
संजय राउत के बयान और पीएम के मंथन पर टिप्पणी
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के संसद पर दिए बयान पर टिप्पणी करते हुए जगताप ने कहा कि संसद 140 करोड़ लोगों का मंदिर है और इसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बात से सहमति जताई कि "उसी मंदिर में लोकतंत्र की हत्या हो रही है" क्योंकि संसद ठीक से नहीं चल रही है और प्रधानमंत्री वहां आते नहीं हैं। वहीं, प्रधानमंत्री द्वारा कामकाज पर किए जा रहे मंथन पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "चिंतन करिए, मंथन करिए... जो करना है करिए, लेकिन देश का लोकतंत्र बचाइए।"
इनपुट: IANS



