रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

ग्वालियर मंदिर हादसा: पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों का हंगामा, प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद रविवार को पीड़ितों के परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा होकर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर…

ग्वालियर मंदिर हादसा: पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों का हंगामा, प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक हादसे के बाद रविवार को पीड़ितों के परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा होकर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया और गंभीर आरोप लगाए। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस घटना में अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है और 25 से ज्यादा लोग घायल हैं।

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यह हादसा तब हुआ जब शनिवार देर रात शीतला माता मंदिर की पहाड़ी पर एक ट्रक अनियंत्रित हो गया। रविवार सुबह, जब शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा था, तब बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों के सदस्य वहां इकट्ठा हो गए और व्यवस्था पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। स्थिति को संभालने पहुंचे एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव को भी लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें बिना बात किए ही कड़ी सुरक्षा के बीच लौटना पड़ा।

प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा पर सवाल

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिस शीतला माता मंदिर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, वहां एक बड़े ट्रक को प्रवेश कैसे दिया गया। पीड़ित परिवार इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच, एक मृतक गौरव की मां किरण ने पुलिसकर्मियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा हादसे के बाद जिंदा था, लेकिन पुलिस की लापरवाही ने उसकी जान ले ली। उन्होंने कहा, "मेरा 14 साल का बेटा शीतला मंदिर गया था और वहां ट्रक के नीचे दब गया। घटना रात 12 बजे हुई, लेकिन पुलिस सुबह 4 बजे तक नहीं पहुंची।"

"मेरा बेटा जिंदा था, पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया"

किरण ने आगे बताया, "अस्पताल में भर्ती के समय बेटे की सांस चल रही थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हम लोगों ने रास्ता रोका और बच्चे को एक प्राइवेट अस्पताल ले जा रहे थे... लेकिन हमें पुलिसकर्मी बस स्टैंड के पास से वापस लौटाकर ले आए। इसके कारण मेरे बेटे की मौत हो गई।"

अन्य पीड़ितों के परिवार भी सदमे और गुस्से में हैं। मृतक सुरेंद्र की मां आशा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें बेटे के बारे में गलत जानकारी दी और मिलने तक नहीं दिया। वहीं, एक और मृतक दिव्यांश के पिता अशोक ने इस पूरे मामले में प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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