बेंगलुरु में वोटर लिस्ट सत्यापन पर विवाद, कर्नाटक हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और सरकार से मांगा जवाब
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ग्रेटर बेंगलुरु के कुछ चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राज्य सरकार, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (KSEC) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ग्रेटर बेंगलुरु के कुछ चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राज्य सरकार, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (KSEC) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की गई है।
यह याचिका महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदाताओं — एम. विवेक, एम. श्रीनाथ, एस.टी. मंजूनाथ, टी.आर. सतीश और के.आर. आनंद मूर्ति — द्वारा दायर की गई है। उन्होंने राज्य चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाया है जिसके तहत ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के कुछ चुनिंदा वार्डों में अलग से SIR कराया जा रहा है।
क्या है याचिकाकर्ताओं की आपत्ति?
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब भारत निर्वाचन आयोग पहले से ही पूरे देश में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कर रहा है, जिसमें कर्नाटक तीसरे चरण में शामिल है, तब राज्य चुनाव आयोग द्वारा अलग से समानांतर सत्यापन अभियान चलाना कानूनी और संवैधानिक रूप से वैध नहीं है।
याचिका में इस प्रक्रिया को मनमाना, भेदभावपूर्ण और देश की स्थापित मतदाता सूची संशोधन व्यवस्था के विरुद्ध बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि वह चुनिंदा क्षेत्रों में चलाए जा रहे इस विशेष पुनरीक्षण की वैधता और संवैधानिकता की जांच करे। फिलहाल, हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से इस मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
इनपुट: IANS



