क्या भगवान बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी दोनों का गोत्र और वंश एक है ?
भगवान बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी दोनों के गोत्र और वंश अलग-अलग थे। बुद्ध शाक्य वंश के गौतम गोत्र से थे, जबकि महावीर ज्ञातृ वंश के काश्यप गोत्र से संबंधित थे।
भगवान बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी का प्राचीन भारतीय इतिहास में बहुत महत्व है. महात्मा बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी तथा महावीर स्वामी ने जैन धर्म को आगे बढाया था. ये दोनों ही धर्म भारत में उस समय फैली ब्राह्मण धर्म की बुराईयों की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप शुरू हुए थे. दोनों ही धर्मों ने अहिंसा को महत्व दिया गया. लेकिन बौद्ध धर्म की तुलना में जैन धर्म अहिंसा के मामले में ज्यादा सख्ती से इनका पालन करता था. इसी कारण जैन धर्म में कृषि से जुड़े कार्य को अच्छा नहीं माना जाता था. इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि कृषि के दौरान अनेंक जीवों की मृत्यु हो जाती है.

भगवान बुद्ध का गोत्र और वंश-
महात्मा बुद्ध का जन्म लगभग 563 ई.पू. हुआ था. उनका जन्म शाक्य गणराज्य की तत्कालीन राजधानी कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी में हुआ था. अगर इनके गोत्र की बात कि जाए जो गौतम गोत्र में जन्म लेने के कारण ही ये गौतम भी कहलाए. महात्मा बुद्ध का जन्म शाक्य वंश में हुआ था. इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था. ऐसा माना जाता है कि जब उनका जन्म हुआ तो उनके बारे में भविष्यवाणी की गई थी कि यह बालक या तो बहुत प्रतापी राजा बनेगा या बड़ा संत महात्मा. भगवान बुद्ध की तरफ से लोगों को मध्यम मार्ग को अपनाने का संदेश दिया. इसके द्वारा शुरू किए गए बौद्ध धर्म को विदेशो में भी अपनाया गया. मौर्यकाल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल चुका था. इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक धर्म है.

भगवान महावीर स्वामी का गोत्र और वंश-
भगवान महावीर स्वामी का ज्ञातृ वंश के क्षत्रिय थे तथा ये काश्यप गोत्र से संबंध रखते थे. ये जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर थे. इनका जन्म वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में हुआ था. इन्होंने ज्ञान प्राप्त करने के लिए 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की. जिसके बाद इनको कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई. इनके अनुसार हमें दूसरो के प्रति भी वहीं व्यवहार करना चाहिएं जो हमें खुद के लिए पसंद हो. इन्होंने ही ” जियो और जीने दो” का सिद्धांत दिया था. इन्होंने जैन धर्म मानने वालों के लिए पांच व्रत भी बताए हैं. जिनमें सत्य , अहिंसा , अचौर्य , अपरिग्रह , ब्रह्मचर्य को शामिल किया जाता है. 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी ( राजगीर ) में इनको निर्वाम ( मोक्ष ) की प्राप्ति हुई.
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भगवान बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी दोनों का गोत्र और वंश-
भगवान महावीर स्वामी और भगवान बुद्ध का गोत्र और वंश एक नहीं है. ये दोनों अलग अलग गोत्र और वंश से संबंध रखते थे. इन दोनों का जन्म ऐसे समय में हुआ जब प्राचीन भारत में ब्राह्मण व्यवस्था में लोगों अंधविश्वास और कर्मकांड़ों से बहुत परेशान थे. इसके साथ ही उस समय हिंसा द्वारा जानवरों की भी बलि के नाम पर बड़ी संख्या में हत्या कर दी जाती थी.
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