गुजरात GIDC भूमि घोटाला: कांग्रेस ने उठाए सवाल, अदालतों की टिप्पणी के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
गुजरात में औद्योगिक भूमि आवंटन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) से…
गुजरात में औद्योगिक भूमि आवंटन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) से जुड़ा है, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपए के औद्योगिक प्लॉट एक ही पक्ष को आवंटित करने का दावा किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गोहिल ने कहा कि इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, दोनों ने अधिकारियों की मंशा को 'दुर्भावनापूर्ण' पाया है।
यह पूरा विवाद वलसाड जिले के उमरगांव ब्लॉक स्थित सरीगांव औद्योगिक क्षेत्र का है। यहां 20 औद्योगिक प्लॉट, जिनकी कीमत करोड़ों में है, एक ही पार्टी को दे दिए गए। आरोप है कि यह सौदा बेहद कम कीमत वाली कृषि भूमि के बदले में किया गया, जिसमें GIDC की सभी प्रक्रियाओं और नियमों की अनदेखी की गई।
न्यायालयों ने की सख्त टिप्पणी
इस आवंटन के खिलाफ एक नागरिक ने गुजरात हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने न केवल सभी 20 प्लॉटों का आवंटन रद्द कर दिया, बल्कि यह भी टिप्पणी की कि अधिकारियों ने कानून के खिलाफ जाकर काम किया और उनकी मिलीभगत साफ नजर आती है। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने बताया कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के फैसले और उसकी टिप्पणियों को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि GIDC अधिकारियों ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से काम किया था।
मुआवजे में भी अनियमितता का आरोप
गोहिल ने एक और अनियमितता का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जिस पक्ष को औद्योगिक प्लॉट दिए गए थे, उसे भूमि सीलिंग के एक पुराने मामले में मुआवजा देने में भी गड़बड़ी की गई। अधिकारियों ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर लगभग 30 करोड़ रुपए का मुआवजा तय किया, जबकि मामला उस कानून के लागू होने से पहले का था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी संज्ञान लेते हुए कहा कि पार्टी को कानून के अनुसार केवल लगभग 1 करोड़ रुपए का ही मुआवजा मिलना चाहिए, 30 करोड़ नहीं।
कांग्रेस ने की केंद्रीय जांच की मांग
इन अदालती टिप्पणियों के आधार पर शक्ति सिंह गोहिल ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि GIDC की नीतियों को बार-बार बदलकर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी नीतिगत बदलावों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बनाने की भी मांग की। गोहिल ने यह भी कहा कि अगर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग अन्य मामलों की जांच कर सकते हैं, तो उन्हें इस मामले की भी जांच करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति का पता लगाना चाहिए।
इनपुट: IANS



