शराब की बोतलों पर उम्र के झूठे दावे और मिलावटी फ्लेवर? FSSAI ने कंपनियों को भेजा नोटिस
अगर आप शराब की बोतलों पर '8 साल पुरानी' या 'एज्ड' जैसे लेबल देखकर उसे खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई शराब कंपनियों को उनके उत्पादों में अनधिकृ
अगर आप शराब की बोतलों पर '8 साल पुरानी' या 'एज्ड' जैसे लेबल देखकर उसे खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई शराब कंपनियों को उनके उत्पादों में अनधिकृत फ्लेवर मिलाने और उम्र को लेकर भ्रामक दावे करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, FSSAI ने रम, व्हिस्की, वोदका और बीयर बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। नियामक ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां जल्द ही सुधार नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेबल पर धोखाधड़ी
FSSAI की जांच में पाया गया कि कुछ कंपनियां अपनी बोतलों पर 'एज्ड', '8 साल' या '12 साल पुराना' जैसे दावे कर रही थीं, जबकि यह नियमों का उल्लंघन था। नियमों के अनुसार, किसी भी ब्लेंडेड शराब पर उम्र का दावा मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र की स्पिरिट के आधार पर ही किया जा सकता है।
हालांकि, कुछ कंपनियां मिश्रण में थोड़ी मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को 'एज्ड' बता रही थीं और उसे प्रीमियम कीमत पर बेच रही थीं। FSSAI ने इस प्रैक्टिस को उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और भ्रामक बताया है।
स्वाद और सुगंध में मिलावट
उम्र के दावों के अलावा, नियामक ने पाया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में ऐसे सिंथेटिक फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही थीं जो व्हिस्की और वाइन जैसे पेय पदार्थों के प्राकृतिक स्वाद और सुगंध की नकल करते हैं। FSSAI का कहना है कि ऐसे अनधिकृत फ्लेवर का इस्तेमाल न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को उत्पाद की असली गुणवत्ता के बारे में भी गुमराह करता है।
FSSAI की कड़ी चेतावनी
FSSAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि इन कंपनियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। उन्हें बाजार में मौजूद बैचों की लेबलिंग ठीक करने या जरूरत पड़ने पर उत्पादों को वापस बुलाने का निर्देश भी दिया गया है।
यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो उन पर भारी जुर्माना, लाइसेंस का निलंबन या उसे रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई हो सकती है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
इनपुट: IANS



