शनिवार, 11 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त आयुर्वेदिक दवाओं की संपूर्ण जानकारी व दवाओं की सूची ?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. जहां पर सरकारें लोगों के द्वारा चुनी जाती हैं. इसी कारण सरकारें पूरी तरह से जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त आयुर्वेदिक दवाओं की संपूर्ण जानकारी व दवाओं की सूची ?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है. जहां पर सरकारें लोगों के द्वारा चुनी जाती हैं. इसी कारण सरकारें पूरी तरह से जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं. जिसकी वजह से सरकार द्वारा लोगों की भलाई के लिए तरह तरह की योजनाएं तथा विकास कार्य कराएं जाते हैं. लेकिन लोगों तक कुछ योजनाओँ और सरकार द्वारा दी जाने वाली विशेष रियायतों की जानकारी नहीं पहुँच पाती है. इसी कारण लोगों के मन में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संबंधित कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त आयुर्वेदिक दवाओं की संपूर्ण जानकारी व दवाएं ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

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आयुर्वेदिक दवा

वर्तमान में उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं. कोरोना महामारी के दौरान काफी लोगों की दुखद मौत हुई थी. जिसके बाद यह महामारी फिर से ना फैले इसी कारण सरकार की तरफ से ऐलोपैथी, आयुर्वेदिक , होम्योपैथी इत्यादी पद्दतियों पर आधारित दवाओं का वितरण किया गया. इसी कड़ी में आयुष रक्षा किट का वितरण किया गया. इस में शामिल दवाओं हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं. जिससे हमारे शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत आती है. हालांकि शुरूआत में इनका वितरण उत्तरप्रदेश में हुए चुनाव में लगे चुनावकर्मियों तथा फ्रंटलाइन वर्करों में किया गया था. ऐसा बताया जाता है कि ये दवाएं होम आइसोलेस होने वाले मरीजों के लिए भी बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकती हैं.

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आयुर्वेदिक दवा

आयुष किट में शामिल आयुर्वेदिक दवाओं की सूची-

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुफ्त में वितरित की जाने वाली आयुष किट में शामिल आयुर्वेदिक दवाओं की बात करें, तो इसमें च्यवनप्रास - 180 ग्राम , आयुष काढ़ा - 100 ग्राम , संशमनी वटी- 30 ग्राम तथा अणु तेल - 10 ml शामिल हैं. अगर इन दवाओं के इस्तमाल की बात करें, तो च्यवनप्रास दिन में एक चम्मच प्रयोग करना चाहिएं. आयुष काढ़ा के 3 ग्राम को 150 ml पानी में उबालना है. इसके बाद इसे छानकर इनका सेवन करना होता है. वहीं अगर संशमनी वटी की खुराक की बात करें, तो इसके 2 गोली दिन में 2 बार गर्म पानी के साथ लेनी होती हैं. इसके अलावा अणु तेल की प्रयोग की विधि की बात करें, तो 2 ड्राप नाक में दिन में 2 बार डालना होता है. इस तरह इऩ आयुर्वेदिक दवाओं से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा इससे कोरोना से बचा जा सकता है.

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आयुर्वेद एक बहुत ही पुरानी इलाज की पद्दति है. आयुर्वेदिक पद्दति से इलाज का जन्म हजारों साल पहले भारत में ही हुआ था. अगर आयुर्वेद की शाब्दिक अर्थ की बात करें, तो इसका अर्थ है- जीवन का ज्ञान. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी इसे एक पारंपरिक चिकित्सा प्राणाली के रूप में स्वीकारा है. ऐलोपेथी दवाओं से आयुर्वेद की तुलना नहीं की जा सकती. इसका कारण यह है कि इनका काम करने का तरीका ही अलग होता है. अगर साधारण शब्दों में बात करें, तो ऐलोपैथी में दवाएं रोगों से लड़ने के लिए तैयार की जाती हैं, वहीं आयुर्वेदिक दवा शरीर में प्रतिरोधक क्षमता तैयार करती हैं, ताकि शरीर खुद रोगों से लड़ने के लिए तैयार हो सके. आयुर्वेद में बीमारी को जड़ से खत्म करने का भी दावा किया जाता है.

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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