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अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों की जमानत याचिका फिर खारिज, सरकार ने की प्रभावी पैरवी

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों दोषियों को एक बार फिर अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। बुधवार को न्यायालय ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। समाचार एजेंसी IANS के…

अंकिता भंडारी हत्याकांड: तीनों दोषियों की जमानत याचिका फिर खारिज, सरकार ने की प्रभावी पैरवी
(फोटो: IANS)

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के तीनों दोषियों को एक बार फिर अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। बुधवार को न्यायालय ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रदेश सरकार की ओर से की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते यह याचिका खारिज हुई।

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यह घटना सामने आने के बाद से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने की प्रतिबद्धता जताई थी। इस मामले में पहले ही दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने शुरू से अंत तक मामले को गंभीरता से लिया।

जांच से लेकर सजा तक की प्रक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के 24 घंटे के भीतर ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच के दौरान लगभग 500 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट तैयार हुई, जिसमें करीब 100 गवाहों के बयानों सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने लगातार मजबूती से अपना पक्ष रखा, जिसका परिणाम यह हुआ कि दोषियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज होती रहीं और वे सलाखों के पीछे ही रहे। इसी मजबूत जांच और प्रभावी पैरवी के चलते अंततः अंकिता के हत्यारों को उम्रकैद की सजा मिली।

परिवार को मिला सरकार का साथ

प्रदेश सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया में अंकिता भंडारी के परिवार को प्राथमिकता दी। परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इसके अलावा, जब परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसका सम्मान करते हुए सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। सरकार ने परिवार को संबल देने के लिए 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की और अंकिता के भाई व पिता को नौकरी भी दी।

सरकार ने अपना रुख स्पष्ट रखा था कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे सजा जरूर मिलेगी। वहीं, कांग्रेस समेत अन्य संगठनों द्वारा 'वीआईपी' के नाम पर सवाल उठाए गए, जिसे सरकार ने न्याय की लड़ाई के बजाय मामले का राजनीतिक इस्तेमाल और जनता को भ्रमित करने का प्रयास बताया।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तराखंड डेस्क

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