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DM बोले- बाबा साहब महान समाज सुधारक थे: मऊ में कलेक्ट्रेट में मनाई गई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती – Mau News

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DM बोले- बाबा साहब महान समाज सुधारक थे:  मऊ में कलेक्ट्रेट में मनाई गई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती – Mau News

DM बोले- बाबा साहब महान समाज सुधारक थे: मऊ में कलेक्ट्रेट में मनाई गई डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती – Mau News


जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में ‘भारत रत्न’ बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी और मुख्य राजस्व अधिकारी दिनेश द्वारा बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर किया गया। कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने बाबा साहब के महान व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा साहब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और युगदृष्टा थे, जिन्होंने सदियों से शोषित समाज को आत्मसम्मान के साथ जीने का मार्ग दिखाया।
जिलाधिकारी ने बाबा साहब के मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को उद्धृत किया। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने सभी अधिकारियों को याद दिलाया कि भारतीय संविधान देश की एकता और अखंडता का सबसे बड़ा रक्षक है। हमें इसके मूल्यों को अपने कार्य व्यवहार में उतारना चाहिए। भारत के संविधान के जनक के रूप में, उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों को स्थापित किया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका पूरा नाम भीमराव रामजी आंबेडकर था। उनके माता-पिता भीमाबाई और रामजी मालोजी सकपाल थे, जो ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट प्राप्त की थी। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ के माध्यम से दलितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। बाबा साहब ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और तलाक के समान अधिकार देने की वकालत की। डॉ. आंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उनकी मृत्यु 06 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में हुई थी।

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