संविधान के खिलाफ़ कोई भी मान्यता थोपना गलत: वृंदा करात का धार्मिक टिप्पणी पर बयान
संविधान महिलाओं समेत सभी नागरिकों को बराबरी का दर्जा देता है और धर्म के नाम पर किसी भी ऐसी मान्यता को थोपा नहीं जा सकता जो इसके विरुद्ध हो। यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता वृंदा…
संविधान महिलाओं समेत सभी नागरिकों को बराबरी का दर्जा देता है और धर्म के नाम पर किसी भी ऐसी मान्यता को थोपा नहीं जा सकता जो इसके विरुद्ध हो। यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता वृंदा करात ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वह केरल के एक धर्मगुरु की विवादास्पद टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थीं।
वृंदा करात ने महिलाओं के दमन से जुड़ी विचारधाराओं का विरोध करते हुए कहा, "आखिर हम क्यों मनुवाद का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें पूरी तरह से महिलाओं को दबाने का प्रावधान किया गया है और यहां पर भी आप इस तरह की स्थिति अपनाते हुए नजर आ रहे हैं, वो महज धर्म का सहारा लेकर, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है।"
संवैधानिक मूल्य सर्वोपरि
करात ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है और वह इसका समर्थन करती हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म की आड़ में किसी को दबाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, "एक भारतीय होने के नाते हम सभी लोगों को संविधान के मूल्यों को अपनाने का पूरा अधिकार है।" करात ने यह भी कहा कि अगर ऐसे मुद्दों पर समाज में चर्चा होती है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह किसी धार्मिक बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं, लेकिन उनका मानना है कि इस मामले का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
विवाह पूर्व HIV टेस्ट पर भी दी राय
इसी बातचीत में, जब वृंदा करात से केरल के एक पादरी के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने विवाह से पहले सभी के लिए एचआईवी टेस्ट की वकालत की थी, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से गलत बताया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से गलत है... मैं समझती हूं कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।"
इनपुट: IANS



