जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य के दर्जे पर हंगामा, BJP-कांग्रेस के 4 विधायक सदन से बाहर किए गए
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग को लेकर विधानसभा में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बहस के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मार्शलों को…
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग को लेकर विधानसभा में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बहस के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व कांग्रेस के दो-दो विधायकों को सदन से बाहर निकालना पड़ा।
कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद ने आरोप लगाया कि जब उनकी पार्टी के सदस्य निज़ामुद्दीन भट्ट राज्य के दर्जे की बहाली के प्रस्ताव पर बोल रहे थे, तब भाजपा विधायकों ने लगातार बाधा डालना शुरू कर दिया। इस हंगामे के बाद विधानसभा मार्शलों ने भाजपा के अरविंद गुप्ता व विक्रम रंधावा और कांग्रेस के एडवोकेट इरफान हफीज लोन व इफ्तिखार अहमद को सदन से बाहर कर दिया।
हंगामे की वजह क्या थी?
कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद के अनुसार, बहस के दौरान कांग्रेस सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने के वादे की याद दिलाई। उन्होंने बताया, "इस दौरान 15 लाख रुपए, दो करोड़ नौकरियों और वोट चोरी तथा चंदा चोरी जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया, जिसके बाद भाजपा विधायक नाराज हो गए।"
अहमद ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा विधायकों ने उनके प्लेकार्ड छीनने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी सदस्य से प्लेकार्ड छीनने या उसकी सीट तक पहुंचकर इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसी को नहीं है।" उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि हंगामे के दौरान भाजपा विधायकों के साथ कांग्रेस सदस्यों को भी क्यों बाहर किया गया, जबकि वे अपनी सीट पर ही खड़े थे।
"राज्य का दर्जा बहाली का सही समय कब?"
कांग्रेस विधायक ने भाजपा सदस्यों से सवाल किया कि क्या वे जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं चाहते। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के उन बयानों का भी उल्लेख किया जिनमें परिसीमन और विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। इफ्तिखार अहमद ने पूछा, "सरकार की ओर से स्टेटहुड के लिए जिस 'सही समय' की बात कही जा रही है, वह सही समय आखिर कब आएगा?"
उन्होंने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी ज़मीन, नौकरियों और संसाधनों पर अपना अधिकार मांगते हैं तो उन्हें 'देशद्रोही' कह दिया जाता है, जबकि अन्य राज्यों में ऐसे मुद्दे अलग नजरिए से देखे जाते हैं। उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्थानीय हितों की रक्षा के लिए कानून हैं।
इनपुट: IANS



