दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या 2.5 लाख तक सीमित होगी, नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी
दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाले ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने और उनके संचालन को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने एक नई नीति का मसौदा पेश किया है। प्रस्तावित 'ई-रिक्शा पॉलिसी 2026' के तह…
दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाले ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने और उनके संचालन को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने एक नई नीति का मसौदा पेश किया है। प्रस्तावित 'ई-रिक्शा पॉलिसी 2026' के तहत राजधानी में कुल ई-रिक्शा की संख्या 2.5 लाख पर सीमित करने का प्रस्ताव है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट को फिलहाल सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने बुधवार को जानकारी दी कि पॉलिसी का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में है और सरकार अगले एक महीने तक इस पर लोगों की राय लेगी। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नीति को आकार देकर उसे लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का इरादा दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या को 2.5 लाख तक सीमित करने का है।
अनिवार्य होंगे दस्तावेज़, 90 दिन की मोहलत
एक बार नई पॉलिसी लागू हो जाने के बाद, मौजूदा ई-रिक्शा चालकों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज़ पूरे करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। इन अनिवार्य प्रमाणपत्रों में अनुपालन प्रमाणपत्र (ECC), बैज, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट शामिल हैं। पंकज सिंह ने चेतावनी दी है कि इस समय सीमा के बाद बिना इन दस्तावेज़ों के चलने वाले किसी भी ई-रिक्शा को ज़ब्त कर लिया जाएगा।
सुरक्षा और व्यवस्था पर फोकस
प्रस्तावित नीति में यात्रियों की संख्या और ई-रिक्शा की गति को लेकर भी नियम बनाए गए हैं, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संचालन को बेहतर बनाया जा सके। मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि यह कदम केवल दुर्घटनाओं की प्रतिक्रिया में नहीं, बल्कि दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा अंदरूनी इलाकों और गांवों तक कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण साधन हैं और सरकार उनके व्यवस्थित उपयोग को बढ़ावा देना चाहती है, जिससे ट्रैफिक जाम कम हो और लोगों को सुविधा मिले।
इसी दौरान, फॉल्स सीलिंग गिरने की एक घटना पर आम आदमी पार्टी की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई काम नहीं है, इसलिए वे ऐसे मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने इसे मामूली मरम्मत का मामला बताया और दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर भी AAP पर निशाना साधा।
इनपुट: IANS



