दिल्ली हाईकोर्ट से BSES को झटका, CAG ऑडिट नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड की कैग (CAG) ऑडिट नोटिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि अभी सिर्फ नोटिस जारी हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने बिजली कंपनियों के ऑडिट पर कोई रोक नहीं लगाई है। कैग को धारा 20 का पालन करते हुए कंपनी को सुनवाई का मौका देना होगा।
नई दिल्ली: बीएसईएस (BSES) राजधानी पावर लिमिटेड को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा जारी किए गए ऑडिट नोटिस को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब बीएसईएस के खिलाफ कैग ऑडिट की प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत ने इस मामले में कैग और कंपनी दोनों के लिए अहम कानूनी निर्देश भी जारी किए हैं।
याचिका खारिज करने का आधार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वर्तमान में कैग की ओर से कंपनी को केवल एक नोटिस जारी किया गया है। अभी तक ऑडिट की औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस शुरुआती स्तर पर नोटिस को चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता है, जिसके चलते याचिका को खारिज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत ने बिजली कंपनियों के कैग ऑडिट को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की। अदालत के कथन के अनुसार:
- दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कैग ऑडिट पर किसी भी प्रकार की रोक या पाबंदी नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पुराने फैसले में बिजली कंपनियों के कैग ऑडिट पर पूरी तरह बैन या प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
- यदि सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया जाए, तो बिजली कंपनियों का ऑडिट सही ढंग से कराया जा सकता है।
कैग और कंपनी के लिए अदालत के निर्देश
याचिका खारिज करने के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने भविष्य की प्रक्रिया के लिए कैग और बीएसईएस दोनों के लिए कड़े कानूनी निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि ऑडिट प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
अदालत ने कैग को निर्देश देते हुए कहा कि ऑडिट शुरू करने से पहले उसे 'कैग एक्ट की धारा 20' के तहत निर्धारित पूरी प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा। इसके साथ ही, ऑडिट की कार्रवाई आरंभ करने से पूर्व कैग को संबंधित कंपनी को सुनवाई का निष्पक्ष मौका देना अनिवार्य है।
वहीं, अदालत ने बीएसईएस के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीएसईएस को अपना पक्ष रखने और इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज करने का पूरा अधिकार है।



