अंकित शर्मा हत्याकांड: पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- यह समाज को झकझोरने वाली घटना
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को…
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। सज़ा के ऐलान के बाद ताहिर हुसैन ने अदालत के बाहर पत्रकारों से सिर्फ इतना कहा, "हाईकोर्ट से हमें इंसाफ मिलेगा।"
यह मामला फरवरी 2020 में भड़के दंगों का है, जब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह भयावह तथ्य सामने आया था कि उनके शरीर पर 40 से ज़्यादा घाव थे।
सज़ा का ऐलान और कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले में कुल 11 आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे थे, जिनमें से अदालत ने सबूतों के अभाव में छह को बरी कर दिया। 13 जुलाई को सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था। दिल्ली पुलिस ने अभियोजन पक्ष के तौर पर सभी दोषियों के लिए मौत की सज़ा की मांग की थी। पुलिस की दलील थी कि इससे समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा कि सरकारी अधिकारी की हत्या करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि, अदालत ने इसे फांसी के लायक मामला न मानते हुए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने इस घटना को बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने टिप्पणी की कि अंकित शर्मा की नृशंस हत्या कर उनके शव को जानवर की तरह छोड़ दिया गया था, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर किया।
किन धाराओं में मिली सज़ा?
बचाव पक्ष ने दोषियों के पारिवारिक पृष्ठभूमि और आपराधिक इतिहास न होने का हवाला देकर सज़ा में नरमी की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने अपराध की जघन्यता को देखते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने सभी पांचों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण) के साथ-साथ दंगा भड़काने से जुड़ी धाराओं 147, 148, 149, 153ए और 188 के तहत दोषी पाया। हालांकि, अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश (धारा 120बी) के आरोप से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि यह हत्या दंगों के दौरान माहौल को और भड़काने की एक पूर्व नियोजित साजिश थी।
इनपुट: IANS



