नोएडा पुलिस ने पकड़ा 7 लोगों का गिरोह, साइबर ठगों को किराए पर देते थे बैंक खाते
नोएडा में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेच देता था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल…
नोएडा में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेच देता था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' और फर्जी ट्रेडिंग जैसी योजनाओं के नाम पर लोगों से ठगे गए पैसे को जमा करने और निकालने के लिए किया जाता था। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने 29 जुलाई को फेस-3 थाना क्षेत्र में एक खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेन्द्र सिंह और प्रियंका के रूप में हुई है। ये लोग उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और आगरा के रहने वाले हैं। इनके पास से सात मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक स्टाम्प और चार लेटर हेड बरामद हुए हैं।
ऐसे काम करता था ठगों का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पहले फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए साइबर अपराधियों से संपर्क साधता था। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की सिम वे अपने पास रखते थे और एक खास ऐप ('डिंग एसएमएस') के जरिए खाते के सारे ओटीपी और संदेश खुद हासिल कर लेते थे। इससे मुख्य धोखेबाज ठगी की रकम को आसानी से एक खाते से दूसरे में ट्रांसफर कर पाते थे।
पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी कुछ समय बाद इन खातों को बंद कर देते थे, ताकि जांच की पकड़ में आने से बच सकें। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन खातों के जरिए लाखों रुपए का लेनदेन हुआ है और इनके खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी कुल 74 शिकायतें पहले से दर्ज हैं।
कमीशन पर करते थे काम
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे इन बैंक खातों को साइबर ठगों को बेचकर उनसे ठगी की रकम का एक निश्चित प्रतिशत कमीशन के तौर पर लेते थे। इस पैसे को वे आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने सभी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब उनके वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
इनपुट: IANS



