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कोर्ट में नामकरण की अनोखी कहानी

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आये दिन समाज में कुछ ना कुछ अनोखा सुने या देखने को मिलता है. वहीं पहली बार आप यह सुनेगे कि  एक बच्चें का नामकरण किसी हाई कोर्ट द्वारा किया गया. जी हाँ, इस बार एक अनोखा मामला केरल हाईकोर्ट द्वारा सुनाया गया. केरल हाईकोर्ट ने दो ऐसे जोड़े के बच्चें का मामला हल किया है जिसे सुनकर आप भी रहा जाएगे अचंभित. केरल हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग रह रहे मां-बाप के बेटे का नामकरण किया है.

क्या है मामला

आपको बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने एक बच्चें का कोर्ट में नामकरण किया. दोनों के माता-पिता अलग अलग धर्म होने की वजह से अपने बेटे का नामकरण करने में विफल हो रहें थे. जानकरी से यह पता चला है कि बच्चे की माँ ईसाई और पिता हिंदू हैं. दोनों ही माता-पिता अपने-अपने धर्म के अनुसार अपने बेटे का नाम रखना चाहते थे. जिसे लेकर दोनों के बीच आए दिन कोई ना कोई विवाद होता रहता था. आए दिन की इस अनबन के बढ़ जाने कि नौबत तलाक तक पहुंच गई. जब यह मामला कोर्ट तक पहुंचा तो जज ने ही नामकरण करने का आदेश दें दिया.

दोनों के द्वारा दायर की थीं अलग-अलग याचिकाएं

बता दें कि दोनों माता-पिता से जब इस समस्या का समाधान नहीं निकला तो उन्होंने कोर्ट का रास्ता लिया. जहां दोनों ने बेटे के नाम पर सहमति ना बनने पर बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र की मांग को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं. माँ ने कोर्ट को बताया कि बपतिस्मा के समय बच्चे का नाम जॉन मनी सचिन रखा गया था. वहीं पिता ने दावा किया कि बेटे के जन्म के 28वें दिन हुए समारोह में उसे अभिनव सचिन नाम दिया गया.

जब दोनों ने अपनी-अपनी राय बताई तो अदालत ने कहा कि बच्चे को जल्द से जल्द नाम दिया जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि कुछ ही दिन में उसका स्कूल में दाखिला होना है. औए दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनना अतियंत आवश्यक माना जाता है.

जज द्वारा फैसले में यह भी कहा कि उन्होंने दोनों के पक्षों को काफी ध्यान से सुना है. और उन्होंने यह नतीजा लिया कि बच्चे को जॉन सचिन नाम दिया जा रहा है. क्योंकि जॉन मां, जबकि सचिन पति के पक्ष को दर्शाएगा, इस तरह दोनों पक्षों की बात रह जाएगी.

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