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चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का क़हर: शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने बाढ़ पर जताई चिंता, चतुर्मास के बाद करेंगे दौरा

भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने पिछले आठ दिनों से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस आपदा पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने गहरी चिंता व्यक्त की है…

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का क़हर: शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने बाढ़ पर जताई चिंता, चतुर्मास के बाद करेंगे दौरा
(फोटो: IANS)

भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की विनाशकारी बाढ़ ने पिछले आठ दिनों से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस आपदा पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, मथुरा के गोवर्धन में चतुर्मास व्रत का पालन कर रहे शंकराचार्य ने कहा कि व्रत समाप्त होते ही वह स्वयं चित्रकूट का दौरा करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे।

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शंकराचार्य ने चित्रकूट से आ रही खबरों को 'कष्टदायी' बताते हुए कहा, “वहां लगातार पिछले आठ दिन से मां मंदाकिनी बहुत प्रकोप में हैं। बाढ़ बहुत ज्यादा आई है, जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और भारी नुकसान हुआ है।” उन्होंने बाढ़ की स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन और समाजसेवियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “वहां के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बहुत सराहनीय कार्य किए हैं, स्थिति को संभाला है।”

चतुर्मास के बाद दौरा और मदद का आश्वासन

शंकराचार्य ने घोषणा की कि वह अपनी ओर से हरसंभव मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “हम अभी गोवर्धन में चतुर्मास व्रत में हैं और चतुर्मास समाप्त होते ही हम स्वयं चित्रकूट धाम का भ्रमण करेंगे और हमारे मठ की ओर से जो जरूरी सहयोग है वह दिया जाएगा।” उन्होंने विशेष रूप से जंगली क्षेत्रों में रहने वाले साधु-संतों की कठिनाइयों का उल्लेख किया, जो सांसारिक आडंबर से दूर रहकर तपस्या करते हैं।

पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाने की निंदा

बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने पाकिस्तान में 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना की भी निंदा की। उन्होंने इसे एक 'बहुत ही निंदनीय' कृत्य बताते हुए भारत सरकार से राजनयिक दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में धर्मस्थलों का अपमान नहीं होना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हुए सभी धर्मों और उनकी भावनाओं की रक्षा की जानी चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तराखंड डेस्क

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