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तिब्बत का चीलोंग बंदरगाह: सिर्फ 7 मिनट में कैसे आई विनाशकारी तबाही, जानें वजह

तिब्बत के चीलोंग बंदरगाह पर 26 अगस्त को आए विनाशकारी भूस्खलन के पीछे की वजह एक श्रृंखलाबद्ध प्राकृतिक आपदा थी, जिसकी शुरुआत नेपाल की सीमा के भीतर एक ग्लेशियर के ढहने से हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस…

तिब्बत का चीलोंग बंदरगाह: सिर्फ 7 मिनट में कैसे आई विनाशकारी तबाही, जानें वजह
(फोटो: IANS)

तिब्बत के चीलोंग बंदरगाह पर 26 अगस्त को आए विनाशकारी भूस्खलन के पीछे की वजह एक श्रृंखलाबद्ध प्राकृतिक आपदा थी, जिसकी शुरुआत नेपाल की सीमा के भीतर एक ग्लेशियर के ढहने से हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना की भयावहता के मुख्य कारण इलाके की खड़ी ढलान और मलबे की हैरान कर देने वाली तेज़ रफ़्तार थे, जिसने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह पूरी घटना मात्र 7 मिनट के भीतर घट गई। इसकी शुरुआत नेपाल के इलाके में समुद्र तल से लगभग 5,140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थ्सुओच्येन नदी के ऊपरी हिस्से से हुई। यहां करीब 6.2 लाख वर्ग मीटर का एक ग्लेशियर पूरी तरह से ढह गया, जिससे भारी मात्रा में मलबा तेज़ी से घाटी की ओर बह निकला।

कैसे एक ग्लेशियर बना भूस्खलन का कारण?

यह मलबा चीन-नेपाल सीमा पर बहने वाली कुओपा श्याक्यू नदी में जा मिला। इसके बाद यह पश्चिम की ओर बहते हुए तोंगलिन त्सांगपो नदी में पहुंचा और एक बेहद तेज़ प्रवाह वाले भूस्खलन में तब्दील हो गया। इसने 26 अगस्त को सुबह करीब 10:30 बजे शीत्सांग के शिकाजे शहर में स्थित चीलोंग बंदरगाह और आसपास के निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता हो गए।

रफ़्तार और ढलान ने बढ़ाया ख़तरा

इस भूस्खलन की विनाशकारी शक्ति का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने लगभग 20 किलोमीटर का सफ़र सिर्फ 7 मिनट में तय कर लिया। इस दौरान इसकी औसत गति लगभग 50 मीटर प्रति सेकंड रही। विशेषज्ञों ने बताया कि इस रास्ते में ज़मीन की ऊंचाई में करीब 3,300 मीटर का भारी अंतर था, जिसने मलबे की रफ़्तार को कई गुना बढ़ा दिया। इसी तीव्र गति के कारण आपदा का प्रभाव और उससे हुई जनहानि इतनी गंभीर रही।

इनपुट: IANS

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