अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: बढ़ती महंगाई और ईरान से तनाव, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ये दो बड़ी वजहें
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद अब इसके कारणों और भविष्य की राजनीति पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में पूर्व…
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद अब इसके कारणों और भविष्य की राजनीति पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में पूर्व राजनयिक वीणा सीकरी ने बताया कि इन नतीजों के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे: देश की अर्थव्यवस्था और ईरान के साथ बढ़ता तनाव। इन परिणामों ने न केवल पार्टी को बड़ा झटका दिया है, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी ने सिर्फ़ बड़ी संख्या में सीटें ही नहीं गंवाईं, बल्कि सीनेट, हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स और कई राज्यों के गवर्नर पदों पर भी अपना नियंत्रण खो दिया। कंसास जैसे राज्य, जो दशकों से रिपब्लिकन का गढ़ माने जाते थे, वहां भी पार्टी को लगभग 94 साल बाद बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
हार के लिए ट्रंप पर उठती उंगलियां
चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने देशभर में रैलियां की थीं और मतदाताओं से कहा था, 'ऐसे वोट करें जैसे मेरा नाम ही बैलेट पर हो।' वीणा सीकरी के अनुसार, भले ही ट्रंप खुद चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन अभियान से इतना जुड़ जाने के कारण अब पार्टी के भीतर ही हार का ठीकरा उन पर फोड़ा जा रहा है। आमतौर पर मध्यावधि चुनाव गवर्नर और कांग्रेस की सीटों के लिए होते हैं, लेकिन ट्रंप की सक्रियता ने इसे उनके नेतृत्व पर जनमत संग्रह जैसा बना दिया।
हार के पीछे दो प्रमुख कारण
विश्लेषकों के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे दो मुख्य मुद्दे थे। पहला, अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत, जिसमें डीज़ल, पेट्रोल और रोज़मर्रा की चीज़ों की बढ़ती कीमतें शामिल थीं। माना जा रहा है कि ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ़) का बोझ आख़िरकार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही पड़ा। दूसरा बड़ा कारण ईरान के साथ बढ़ता संघर्ष था। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसका सीधा असर अमेरिकी जनता पर पड़ा।
ईरान पर भविष्य की रणनीति और ट्रंप का रुख
पूर्व राजनयिक ने कहा कि इस समय दो समानांतर घटनाएं चल रही हैं—एक तरफ़ कतर और तेहरान में शांति वार्ता के प्रयास, तो दूसरी ओर ईरान पर बड़े अमेरिकी हमले की तैयारियों की ख़बरें। रिपोर्टों के अनुसार, इज़रायल को पैट्रियट मिसाइलें भी भेजी गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप अपनी ईरान नीति जारी रखेंगे या पार्टी नेताओं से सलाह-मशविरा करेंगे।
चुनाव नतीजों के बाद ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि वह 'मिस्टर वीटो' बनकर उनके प्रस्तावों को रोक भी सकते हैं। नए चुने गए कांग्रेस सदस्य जनवरी में शपथ लेंगे, और तब तक अमेरिकी राजनीति में ट्रंप के अगले कदमों पर सबकी नज़र रहेगी।
इनपुट: IANS



