विदेशी निवेशकों के लिए आसान हुआ भारतीय बाजार में निवेश, सेबी ने दी डिजिटल KYC की मंजूरी
भारतीय पूंजी बाजार में निवेश करने की प्रक्रिया अब विदेशों में रहने वाले निवेशकों के लिए पहले से कहीं ज़्यादा आसान होने जा रही है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने नियमों में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत आए…
भारतीय पूंजी बाजार में निवेश करने की प्रक्रिया अब विदेशों में रहने वाले निवेशकों के लिए पहले से कहीं ज़्यादा आसान होने जा रही है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने नियमों में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत आए बिना डिजिटल तरीके से KYC प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 3 दिसंबर से लागू हो जाएगी।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) और अन्य विदेशी निवेशकों के लिए निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाना है। उम्मीद है कि इससे भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी भागीदारी को और बढ़ावा मिलेगा।
क्या हैं नए KYC नियम?
संशोधित ढांचे के तहत, अब बाजार मध्यस्थ (जैसे ब्रोकर) पात्र ग्राहकों से KYC से जुड़े दस्तावेज और जानकारी डिजिटल माध्यमों से स्वीकार कर सकेंगे। यह सुविधा केवल उन निवेशकों के लिए है जो वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहते हैं। जिन देशों को FATF ने गैर-अनुपालन सूची में रखा है, वहां के निवेशकों पर पुरानी, कड़ी KYC प्रक्रिया ही लागू रहेगी।
सेबी ने निवेशकों को अपने पासपोर्ट और ओसीआई कार्ड (जहां लागू हो) की प्रतियां जमा करने को कहा है। पते के प्रमाण के तौर पर विदेश में रहने के पते को भी अब मान्यता दी गई है।
एक KYC, कई जगह इस्तेमाल
एक और महत्वपूर्ण सुधार यह है कि निवेशक अब एक मध्यस्थ के पास कराए गए अपने KYC रिकॉर्ड का इस्तेमाल दूसरे मध्यस्थ के साथ लेनदेन के लिए भी कर सकेंगे। इसके लिए KYC पंजीकरण एजेंसियों (KRA) या केंद्रीय KYC रिकॉर्ड रजिस्ट्री में उपलब्ध रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सकता है। इससे निवेशकों को हर बार नए सिरे से प्रक्रिया दोहराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, भले ही उनकी सभी व्यक्तिगत जानकारियों का सत्यापन न हुआ हो।
वीडियो वेरिफिकेशन और सुरक्षा उपाय
नए नियमों के तहत निवेशक KYC फॉर्म डिजिटल या भौतिक रूप से जमा कर सकते हैं और नमूना हस्ताक्षर भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दे सकते हैं। हालांकि, इन हस्ताक्षरों का सत्यापन वीडियो आधारित व्यक्तिगत सत्यापन (In-Person Verification) के दौरान किया जाएगा।
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सेबी ने वीडियो वेरिफिकेशन के दौरान एक अधिकृत अधिकारी की मौजूदगी को अनिवार्य किया है। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया का समवर्ती ऑडिट भी कराना होगा। नियामक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक की जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) की अंतिम जिम्मेदारी बाजार मध्यस्थ की ही होगी और वे जोखिम के आधार पर अतिरिक्त सत्यापन भी कर सकते हैं। मध्यस्थों को KYC पूरी होने के तीन कार्यदिवस के भीतर रिकॉर्ड को KRA पर अपलोड करना होगा। ये नए प्रावधान मौजूदा ग्राहकों की री-केवाईसी प्रक्रिया पर भी लागू होंगे।
इनपुट: IANS



