मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

बच्चों की सेहत: 'शैशव' ऐप से होगी जोखिम वाले नवजातों की डिजिटल निगरानी, राष्ट्रीय कार्यशाला में हुई चर्चा

भारत में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई डिजिटल पहल पर जोर दिया है। 'शैशव' नाम का यह ऐप जन्म से तीन साल तक के 'जोखिम वाले' नवजात शिशुओं और बच्चों की पहचान, डिजिटल…

बच्चों की सेहत: 'शैशव' ऐप से होगी जोखिम वाले नवजातों की डिजिटल निगरानी, राष्ट्रीय कार्यशाला में हुई चर्चा
(फोटो: IANS)

भारत में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई डिजिटल पहल पर जोर दिया है। 'शैशव' नाम का यह ऐप जन्म से तीन साल तक के 'जोखिम वाले' नवजात शिशुओं और बच्चों की पहचान, डिजिटल ट्रैकिंग और समय पर देखभाल सुनिश्चित करने में मदद करेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विषय पर 24-25 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।

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यह दो दिवसीय कार्यशाला केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 'समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम' (SSBSK) पर केंद्रित थी। इसका मुख्य उद्देश्य इस कार्यक्रम के लिए जारी दिशा-निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने की रणनीति बनाना था, ताकि जन्म से लेकर 3 साल तक के बच्चों की देखभाल में कोई कमी न रहे।

देखभाल में तकनीक और मानवीय संवेदना

कार्यशाला का सबसे अहम बिंदु 'शैशव' ऐप रहा। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म जोखिम वाले बच्चों की पहचान से लेकर उनके घर पर जांच का शेड्यूल बनाने, ज़रूरत पड़ने पर उन्हें रेफर करने और फॉलो-अप करने तक की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाएगा। इस ऐप की मदद से हर बच्चे का एक विस्तृत स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार होगा, जो उसके शुरुआती बचपन की सारी जानकारी एक ही जगह पर सहेजेगा। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग सिर्फ़ सही समय पर निर्णय लेने के लिए होगा, लेकिन देखभाल में मानवीय संवेदना और परिवार-केंद्रित नज़रिया हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।

शुरुआती 3 साल सबसे महत्वपूर्ण

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत ने शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कमज़ोर नवजातों पर अभी और ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "बच्चों की सेहत में सुधार के लिए शुरुआती पहचान, जोखिम के आधार पर फॉलो-अप और समय पर कार्रवाई जरूरी है।" पटनायक ने बच्चे के जीवन के पहले 7 दिन और मस्तिष्क के विकास के लिए पहले 3 साल को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत टीम वर्क पर भी ज़ोर दिया।

क्या है समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK)?

यह कार्यक्रम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा 29 जून को लॉन्च किया गया था। 'पहले तीन साल, संपूर्ण देखभाल' के विजन के साथ यह कार्यक्रम जन्म से 36 महीने तक के बच्चों के लिए एक एकीकृत और डिजिटल रूप से सक्षम देखभाल व्यवस्था बनाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ बच्चों का जीवन बचाना नहीं, बल्कि उनके स्वस्थ विकास, पोषण और समय पर सही इलाज सुनिश्चित करना भी है।

कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा हुई कि स्वास्थ्य, पोषण या विकास संबंधी समस्याओं वाले किसी भी बच्चे का फॉलो-अप न छूटे। इसमें सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

इनपुट: IANS

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