मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

गुजरात: 'कागजी' शिक्षकों को बचाने के लिए 10 लाख की रिश्वत की पेशकश, CBI ने कॉलेज ट्रस्टी पर केस किया

गुजरात के एक आयुर्वेदिक कॉलेज के 13 शिक्षकों की जांच में अनुकूल रिपोर्ट देने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत की पेशकश का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने…

गुजरात: 'कागजी' शिक्षकों को बचाने के लिए 10 लाख की रिश्वत की पेशकश, CBI ने कॉलेज ट्रस्टी पर केस किया
(फोटो: IANS)

गुजरात के एक आयुर्वेदिक कॉलेज के 13 शिक्षकों की जांच में अनुकूल रिपोर्ट देने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत की पेशकश का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में जूनागढ़ स्थित नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के एक ट्रस्टी और एक फैकल्टी मेंबर के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने जांच समिति की एक सदस्य को यह रिश्वत देने की कोशिश की थी।

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यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 'नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन' (NCISM) ने जूनागढ़ के नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के 13 शिक्षकों की जांच के लिए एक हियरिंग कमेटी बनाई। इन शिक्षकों पर शक था कि वे सिर्फ कागजों पर ही मौजूद हैं, यानी उनकी नियुक्ति वास्तविक नहीं है। इस कमेटी में लखनऊ के प्रबुद्ध आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रूपाली आर. महादिक को सदस्य नियुक्त किया गया था।

जांच अधिकारी को फंसाने की कोशिश

CBI की FIR के मुताबिक, 18 अगस्त को नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के फैकल्टी मेंबर डॉ. अभय नलावडे ने डॉ. महादिक को व्हाट्सएप कॉल किया। आरोप है कि उन्होंने इन 13 शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट देने के बदले रिश्वत की पेशकश की। डॉ. महादिक ने इसकी जानकारी NCISM के एक वरिष्ठ अधिकारी, डॉ. मुकुल पटेल को दी, जिन्होंने उन्हें सबूत इकट्ठा करने के लिए आरोपी के संपर्क में बने रहने की सलाह दी।

इसके बाद 20 अगस्त को कॉलेज के ट्रस्टी प्रतीक मोरी ने डॉ. महादिक से बात की और सभी 13 शिक्षकों के नाम क्लियर करने के लिए 10 लाख रुपये देने का वादा किया। FIR में कहा गया है कि मोरी ने यह रकम 22 अगस्त को दिल्ली में देने की बात कही थी।

CBI ने दर्ज किया मामला

रिश्वत लेने से इनकार करते हुए डॉ. महादिक ने 21 अगस्त को CBI को हाथ से लिखकर एक शिकायत दी और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। CBI की शुरुआती जांच में भी यह बात सामने आई कि मोरी और नलावडे ने शिकायतकर्ता को रिश्वत का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद एजेंसी ने आपराधिक साजिश और एक सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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