क्या बर्ड फ्लू से इंसान को भी खतरा हो सकता है?
बर्ड फ्लू से चिड़िया से इंसान व इंसान से चिड़िया में बर्ड फ्लू के फैलने का खतरा बेहद कम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एहतियात बरतना बेहतर है।
बर्ड फ्लू से चिड़िया से इंसान व इंसान से चिड़िया में बर्ड फ्लू के फैलने का खतरा बेहद कम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एहतियात बरतना बेहतर है। एवियन इंफ्लूएंजा मल, लार व संक्रमित पक्षी के स्राव के जरिये इंसानों में फैलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुर्गे या बतख जैसे पक्षी के कारोबार से जुड़े लोगों में बर्ड फ्लू का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन एहतियात बरतते हुए वे खुद को बचा सकते हैं। पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले लोग ग्लव्स आदि का इस्तेमाल करें और साफ-सफाई रखें तो बर्ड फ्लू के खतरे को टाल सकते हैं। पक्षियों के शवों को न छुएं और इसकी जानकारी तत्काल प्राधिकारियों को दें।

बर्ड फ्लू इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। ऐसा तब होता है जब वायरस हवा में होता है और इंसान गहरी सांस ले लेता है। इस दौरान वायरस आंखों, मुंह या नाक के जरिये इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है।बर्ड फ्लू मामूली से लेकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में दर्द, सर्दी-जुकाम, मांसपेशियों व शरीर में दर्द, थकान, सिरदर्द, आंखें लाल होना व सांस लेने में परेशानी आदि शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों में 40 से अधिक कौवों की मौत की सूचना आई है। इसे लेकर क्षेत्र में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।सभी एवियन इंफ्लूएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते। हालांकि, कुछ वायरस इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। एवियन इंफ्लूएंजा एच5एन8 वायरस, जिसे सामान्य तौर पर बर्ड फ्लू के रूप में जाना जाता है, उनमें से एक है। यह श्वसन प्रणाली में संक्रमण पैदा कर सकता है।

बतख व हंस जैसे पक्षियों की कुछ प्रजातियों को इंफ्लूएंजा टाइप-ए वायरस का प्राकृतिक वास माना जाता है। ये अपने मल के जरिये रोग का प्रसार करते हैं।इंसान से इंसान में बर्ड फ्लू का प्रसार सामान्य नहीं है। जो लोग संक्रमित पक्षियों के बीच काम करते हैं (चाहे वे जीवित हों या मृत) या बिना पकाए या अधपका मुर्गा या बतख का सेवन करते हैं उन्हें बर्ड फ्लू का खतरा ज्यादा होता है।
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