क्या किसी भी जाति या वर्ण की कन्या का पूजन नवरात्रि में कर सकते हैं ?
नवरात्रि में किसी भी जाति या वर्ण की कन्या का पूजन किया जा सकता है क्योंकि कन्याओं को माता का रूप माना जाता है। 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं का पूजन करना परंपरागत रूप से प्रचलित है।
हिंदू धर्म में नवरात्री पूजा का विशेष महत्व है. नवरात्रि में 9 दिनों तक माँ शक्ति की अलग अलग रूपों में पूजा की जाती है. किसी भी पूजा के लिए कुछ नियम या विधान निर्धारित किया जाता है. अगर विधि विधान के साथ पूजा की जाती है, तभी उसका पूर्णफल पूजा करने वाले को प्राप्त होता है. इसी कारण नवरात्रि पूजा से संबंधित लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर पूछा जाता है कि क्या किसी भी जाति या वर्ण की कन्या का पूजन नवरात्रि में किया जा सकता है. अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

कन्या पूजन का महत्व -
ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि पूजा को अधूरा ही माना जाएगा, अगर हम कन्या पूजन नहीं करते हैं. कुछ मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है. लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में अष्टमी और नवमीं को कन्या पूजन करने से अधिक फळ मिलता है. कन्या पूजन में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को शामिल करना बहुत ही शुभ माना जाता है. वैसे तो जब हम व्रत करते हैं, तो अपनी श्रद्धा के अनुसार कम या ज्यादा कन्याओं को भोजन करा सकते हैं. लेकिन अगर इनकी आदर्श संख्या की बात की जाए, तो 9 कन्याओं को भोजन करना आदर्श माना जाता है.

इसके साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि जिन 9 कन्याओं को हम भोजन करा रहें हैं, उन्हें हमें माता का रूप ही मानना चाहिएं. कथाओं के अनुसार कन्याओं की उम्र के हिसाब से उनको माता का नाम दिया जाता है. जैसे की जो कन्या दो वर्ष की है उसको कन्या कुमारी, जो कन्या तीन साल की है उसे त्रिमूर्ति, जो कन्या चार साल की है, उसे कल्याणी, पांच साल की कन्या को रोहिणी, छह साल की कन्या को कालिका, सात साल की कन्या को चंडिका, आठ साल की कन्या को शाम्भवी, नौ साल की कन्या को दूर्गा और 10 साल की कन्या को सुभद्रा का स्वरूप माना जाता है. इसके साथ ही इन 9 कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जाता है. भोजन के उपरांत उन कन्याओं को फल व वस्त्र अपनी इच्छा अनुसार भेंट करने चाहिएं.
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क्या किसी भी जाति या वर्ण की कन्या का पूजन-
नवरात्रि में हम जिन कन्याओं का पूजन करते हैं, उन्हें माता के रूप मानते हैं. इसके लिए कोई जाति या वर्ण मायने नहीं रखता है. वैसे भी कहा जाता है कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं. माता की नजरों में कोई धर्म या जाति नहीं होती है, वह अपने बच्चों को समान रूप से प्यार करती है. इसी कारण हम किसी भी जाति या वर्ण की कन्याओं का नवरात्रि पर पूजन कर सकते हैं.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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