मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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BPSC TRE-4 परीक्षा: 5 लाख तक आवेदन पर एक दिन में होगा एग्जाम, आयोग ने अफवाहों पर लगाया विराम

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चल रही अटकलों और अफवाहों पर विराम लगा दिया है। आयोग ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि परीक्षा का आयोजन दो…

BPSC TRE-4 परीक्षा: 5 लाख तक आवेदन पर एक दिन में होगा एग्जाम, आयोग ने अफवाहों पर लगाया विराम
(फोटो: IANS)

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आगामी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चल रही अटकलों और अफवाहों पर विराम लगा दिया है। आयोग ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि परीक्षा का आयोजन दो चरणों में ही होगा और इस निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदन की संख्या के आधार पर यह तय होगा कि परीक्षा एक दिन में होगी या दो अलग-अलग तिथियों में।

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आयोग के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि यदि TRE-4 के लिए पांच लाख तक आवेदन आते हैं, तो परीक्षा एक ही दिन में संपन्न करा ली जाएगी। हालांकि, अगर आवेदकों की संख्या इस सीमा को पार करती है, तो इसे दो अलग-अलग तारीखों पर आयोजित किया जाएगा।

परीक्षा में पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदम

आयोग ने परीक्षाओं को दो चरणों में कराने के फैसले के पीछे की वजह भी बताई। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और कदाचार को रोकना है। उन्होंने बताया कि आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) से मिले सुझावों में भी परीक्षाओं को कम से कम दो चरणों में आयोजित करने की सिफारिश की गई थी। इसके अलावा, हाल ही में नीट परीक्षा के बाद गठित राधाकृष्णन समिति ने भी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दो-चरण की व्यवस्था का सुझाव दिया था।

नेगेटिव मार्किंग और मूल्यांकन पर स्पष्टीकरण

प्रेस कॉन्फ्रेंस में निगेटिव मार्किंग और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी आयोग ने अपनी स्थिति साफ की। राजेश कुमार सिंह ने कहा, "बीपीएससी की सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन का प्रावधान है और यह सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है।" उन्होंने बताया कि इसका मकसद अनुमान के आधार पर उत्तर देकर सफल होने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना है।

हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरते समय माध्यम की जानकारी नहीं ली जाती, इसलिए इस आधार पर तुलना का कोई आंकड़ा ही मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञ करते हैं और 60 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर कोई रोक नहीं है, बस ऐसे मामलों में हेड एग्जामिनर द्वारा उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच की जाती है ताकि मूल्यांकन पारदर्शी रहे।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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