मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

बांग्लादेश: जुलाई आंदोलन मामले में तीन पत्रकारों को जेल भेजा गया, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

बांग्लादेश में जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में तीन वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT)…

बांग्लादेश: जुलाई आंदोलन मामले में तीन पत्रकारों को जेल भेजा गया, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश में जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में तीन वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाकर जेल भेजने का आदेश दिया। जिन पत्रकारों पर यह कार्रवाई हुई है, उनमें 'भोरर कागोज' के पूर्व संपादक श्यामला दत्ता, 'एकात्तोर टीवी' के प्रबंध निदेशक मोजम्मेल बाबू और उनकी मुख्य संवाददाता फरजाना रूपा शामिल हैं।

विज्ञापन

यह पूरा मामला 14 जुलाई, 2024 को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। अभियोजक गाजी मोनाववर हुसैन तमीम ने आरोप लगाया कि इस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के भड़काऊ बयानों के कारण ही तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने "रजाकार" वाली टिप्पणी की थी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

न्यायिक प्रक्रिया और आरोप

जेल अधिकारियों ने सोमवार को तीनों पत्रकारों को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश किया, जो पहले से ही हिरासत में थे। इन पर मानवता के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज किया गया है। आईसीटी ने पिछले हफ्ते ही जेल अधिकारियों को तीनों को पेश करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा पर 2013 में हेफाजत-ए-इस्लाम की रैली पर हुई कार्रवाई से जुड़ा मानवता के विरुद्ध अपराध का एक और मामला भी चल रहा है।

पत्रकारिता पर कार्रवाई की वैश्विक निंदा

पत्रकारों पर 'मानवता के खिलाफ अपराध' जैसे गंभीर आरोप लगाने की दुनिया भर में कड़ी निंदा हो रही है। फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन 'जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस' (JMBF) ने इस कदम को "बेहद चिंताजनक" बताया है। संगठन ने कहा, "पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। राजनीतिक असहमति कोई अपराध नहीं है।" JMBF के संस्थापक शाहनूर इस्लाम ने इसे आपराधिक न्याय प्रणाली का "राजनीतिक प्रतिशोध और डराने-धमकाने" के लिए इस्तेमाल बताया।

इसी तरह, प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले वैश्विक समूह 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने भी बांग्लादेशी अधिकारियों से यह मामला वापस लेने और समाचार रिपोर्टिंग को अपराध बनाना बंद करने की अपील की है। CPJ के एशिया-पैसिफिक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर कुणाल मजूमदार ने कहा, "सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने के लिए पत्रकार श्यामला दत्ता, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा पर 'मानवता के विरुद्ध अपराध' केस शुरू करना चौंकाने वाला और बहुत चिंताजनक है।"

इनपुट: IANS

N

News4Social इंटरनेशनल डेस्क

News4Social इंटरनेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →