यूपी: ग्रामीण आवास योजना में विधवा, दिव्यांग और वंचितों को मिलेगी प्राथमिकता, सरकार ने दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण इलाकों में कच्चे और असुरक्षित घरों में रह रहे गरीब परिवारों को पक्का मकान मुहैया कराने की अपनी मुहिम तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री केशव…
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण इलाकों में कच्चे और असुरक्षित घरों में रह रहे गरीब परिवारों को पक्का मकान मुहैया कराने की अपनी मुहिम तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लाभार्थियों के चयन में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाए।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र गरीब परिवार कच्चे और असुरक्षित मकान में रहने को मजबूर न हो, यह सुनिश्चित करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने अधिकारियों को सभी जिलों में पात्रता के आधार पर लाभार्थियों की सूची तैयार करने का आदेश दिया है, ताकि आवास आवंटन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
किन लोगों पर होगा विशेष ध्यान?
इस योजना में विशेष रूप से असहाय विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों, दैवीय आपदा या गंभीर बीमारी से प्रभावित परिवारों और अनुसूचित जाति-जनजाति के साथ-साथ अन्य पात्र वंचित परिवारों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को गांव-गांव जाकर ऐसे परिवारों की पहचान करने और उनकी स्थिति का संवेदनशीलता से आकलन करने के लिए कहा गया है। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि लाभार्थियों के चयन में किसी भी तरह की लापरवाही, अनियमितता या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लक्ष्य और अब तक की प्रगति
सरकार ने पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में 1.16 लाख नए पक्के मकान बनाने की कार्ययोजना तैयार की थी। IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से अब तक लगभग पांच लाख परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।
गुणवत्ता और निगरानी पर जोर
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक गरीब परिवार के लिए पक्का मकान सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने अधिकारियों को आवास निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि लाभार्थियों की समस्याओं का तुरंत समाधान हो और योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, न कि किसी सिफारिश या पक्षपात के आधार पर।
इनपुट: IANS



