तमिलनाडु: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने का प्रस्ताव विधानसभा में पास
तमिलनाडु में उन हजारों शिक्षकों को एक बड़ी राहत मिल सकती है, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले हुई थी। राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इन शिक्षकों को शिक्षक…
तमिलनाडु में उन हजारों शिक्षकों को एक बड़ी राहत मिल सकती है, जिनकी नियुक्ति 23 अगस्त 2010 से पहले हुई थी। राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इन शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा और अन्य लाभों को लेकर बनी अनिश्चितता को खत्म करना है, जो TET लागू होने से पहले ही सेवा में आ चुके थे।
स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने मंगलवार को यह विशेष प्रस्ताव सदन में पेश किया। उन्होंने बताया कि TET की अनिवार्यता के बाद से राज्य के लगभग 3.28 लाख शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इन शिक्षकों की भर्ती उस समय के नियमों और प्रक्रियाओं के तहत हुई थी, जब TET जैसी कोई शर्त नहीं थी। सरकार का मानना है कि जो शिक्षक एक वैध भर्ती प्रक्रिया के तहत वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उन पर बाद में कोई नई पात्रता शर्त थोपना अनुचित है।
कानूनी सुरक्षा के लिए संशोधन की मांग
प्रस्ताव में केंद्र सरकार से बच्चों के मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया गया है। मंत्री ए. राजमोहन ने स्पष्ट किया कि केवल राज्य सरकार के प्रशासनिक कदम इस कानूनी मुद्दे को पूरी तरह हल नहीं कर सकते, इसलिए केंद्रीय कानून में बदलाव ही एकमात्र स्थायी समाधान है। इस कदम से प्रभावित शिक्षकों को कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी और उनकी नौकरी, प्रमोशन व रिटायरमेंट लाभों को लेकर पैदा हुई चिंता दूर होगी।
सभी दलों ने किया समर्थन
इस प्रस्ताव को सदन में मौजूद सभी राजनीतिक दलों का पूरा समर्थन मिला। सत्ताधारी डीएमके के साथ-साथ एआईएडीएमके, पीएमके, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों ने भी सरकार के इस कदम का पक्ष लिया। चर्चा के दौरान सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए। बहस के बाद स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने ध्वनि मत से प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित घोषित कर दिया। अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
इनपुट: IANS



