बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ, सिवान के बैनर तले सोमवार को जिले के शिक्षक शिक्षा विभाग की अनियमितताओं और समस्याओं के खिलाफ सिवान जिला मुख्यालय स्थित बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर प्रतिमा परिसर, गोपालगंज मोड़ पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। आंदोलन की अगुवाई संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह कर रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सचिव अशोक कुमार प्रसाद तथा संचालन संजय सिंह ने किया।
‘यह केवल शिक्षकों का आंदोलन नहीं’
आंदोलन स्थल पर पहुंचे जीरादेई के विधायक अमरजीत कुशवाहा ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ शिक्षकों का नहीं बल्कि शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को सड़क से विधानसभा तक उठाया जाएगा।
‘नीतीश सरकार पर लगाया बेलगाम अफसरशाही का आरोप’
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुशील कुमार, राजद जिलाध्यक्ष बिपिन कुशवाहा, भाकपा माले के जिला सचिव हंसनाथ राम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता तारकेश्वर यादव और कांग्रेस नेता अशोक कुमार सिंह ने भी आंदोलन का समर्थन किया। इन नेताओं ने नीतीश सरकार पर बेलगाम अफसरशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना निंदनीय है।
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ये हैं शिक्षकों की मुख्य मांगें
शिक्षकों की ओर से उठाई गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- 2015 17/2016 18 बैच के नियमित प्रशिक्षित शिक्षकों को विरमन तिथि से वैचारिक लाभ दिया जाए।
- 13,000 शिक्षकों के खातों से काटी गई ईपीएफ राशि तत्काल जमा की जाए।
- 34,540 से नियुक्त शिक्षकों के एनपीएस खाते में योगदान सुनिश्चित किया जाए।
- मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश और दक्षता पास शिक्षकों के लंबित बकाया का भुगतान किया जाए।
- स्कूलों में चावल की बोरियों में हो रही कमी की भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
विभिन्न संगठनों का समर्थन, सैकड़ों शिक्षक भूख हड़ताल में शामिल
संघ के उपाध्यक्ष संजय सिंह, कोषाध्यक्ष मनीष अभिषेक, जिला मीडिया प्रभारी जावेद आलम, एआईवाईएफ जिला अध्यक्ष उदय चौरसिया और राजद के जिला सचिव दीपक यादव सहित कई नेताओं ने आंदोलन को समर्थन दिया।
भूख हड़ताल में भगवानपुर प्रखंड अध्यक्ष मुकेश कुमार गुप्ता, इमाम अली, धीरज कुमार, दिनेश कुमार, महेश कुमार सिंह, पंकज कुमार श्रीवास्तव और विकास कुमार सिंह सहित जिले भर से सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।
शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षकों की मांगें पूरी तरह से न्यायोचित हैं और सरकार को इन पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। यह आंदोलन न केवल शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए है, बल्कि जिले में शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी माना जा रहा है।