बिहार: मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद के लिए मनोनीत, पद को लेकर चल रहे विवाद पर लगा विराम
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के पद को लेकर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। राज्यपाल ने बुधवार, 5 अगस्त को राज्य सरकार की सिफारिश को मंजूरी देते हुए उन्हें बिहार विधान परिषद…
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के पद को लेकर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। राज्यपाल ने बुधवार, 5 अगस्त को राज्य सरकार की सिफारिश को मंजूरी देते हुए उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है, जिससे उनके मंत्री बने रहने का रास्ता साफ हो गया है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी सदन का सदस्य रहे मंत्री पद पर बने रहने को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, बिहार सरकार द्वारा जारी असाधारण गजट में बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद की खाली सीट पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 5 अगस्त से ही प्रभावी मानी जाएगी।
एनडीए का पूर्व-नियोजित फैसला: उपेंद्र कुशवाहा
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख और एनडीए नेता उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया या अचानक लिया गया फैसला नहीं है। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के तमाम नेताओं के बीच पहले ही यह तय हो गया था कि दीपक प्रकाश को सदन में भेजा जाएगा। जब उन्हें मंत्री बनाया गया था, उसी समय यह निर्णय लिया गया था। आज उसी फैसले को लागू किया गया है।"
कुशवाहा ने इस फैसले को अमल में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित एनडीए के सभी नेताओं का आभार व्यक्त किया।
विपक्ष के दबाव का असर नहीं
विपक्षी दल लगातार दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल उठा रहे थे और नैतिकता के आधार पर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इन मांगों पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह कार्रवाई किसी को जवाब देने या विपक्ष के दबाव में नहीं की गई है, बल्कि यह एक संवैधानिक औपचारिकता थी जिसे पूरा किया गया। उन्होंने कहा, "सवाल उठाने वाले हर बात पर सवाल उठाते हैं। अच्छा काम होगा तब भी सवाल उठाएंगे और कहीं कमी रह जाएगी तो भी सवाल उठाएंगे।"
विपक्ष पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग नैतिकता की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने आचरण पर नजर डालनी चाहिए। कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि दीपक प्रकाश का मनोनयन एनडीए के भीतर पहले से तय एक राजनीतिक निर्णय का हिस्सा था।
इनपुट: IANS



