नौसेना को मिला दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल 'निपुण', आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि
भारतीय नौसेना की समुद्री बचाव और खोजबीन क्षमताओं को एक बड़ी मजबूती मिली है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) द्वारा पूरी तरह देश में डिजाइन और निर्मित दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) 'निपुण'…
भारतीय नौसेना की समुद्री बचाव और खोजबीन क्षमताओं को एक बड़ी मजबूती मिली है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) द्वारा पूरी तरह देश में डिजाइन और निर्मित दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) 'निपुण' गुरुवार को विशाखापट्टनम में नौसेना को सौंप दिया गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव अभियानों को नई शक्ति प्रदान करेगा।
संस्कृत भाषा के शब्द 'निपुण' का अर्थ किसी कार्य में दक्ष और पारंगत होना है। अपने नाम के अनुरूप, यह जहाज अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है और इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण मानकों के तहत बनाया गया है।
गहरे समुद्र में बढ़ी ताकत
'निपुण' की सबसे बड़ी खासियत इसके अत्याधुनिक डाइविंग उपकरण हैं, जो इसे डीप सी सैचुरेशन डाइविंग जैसे जटिल और लंबे मिशन को अंजाम देने में सक्षम बनाते हैं। इसके अलावा, इसमें साइड डाइविंग स्टेज की सुविधा भी है, जिससे समुद्र में कई तरह के ऑपरेशन आसानी से किए जा सकेंगे।
इसकी क्षमता को और बढ़ाने के लिए इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) भी तैनात किए गए हैं। ये आरओवी न सिर्फ गोताखोरों की निगरानी करेंगे, बल्कि गहरे पानी में खोज, बचाव और मलबा निकालने जैसे अभियानों को भी प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद करेंगे।
'आत्मनिर्भर भारत' की मिसाल
यह पोत डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) के लिए 'मदर शिप' के तौर पर भी काम करेगा। इसका मतलब है कि किसी पनडुब्बी में आपात स्थिति होने पर डीएसआरवी के जरिए फंसे हुए कर्मियों को सुरक्षित निकालने में 'निपुण' एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा।
इस जहाज के निर्माण में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। 'निपुण' के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इनपुट: IANS



