HPV से सुरक्षा में भारत की बड़ी कामयाबी, 80 लाख से ज़्यादा लड़कियों को लगा कैंसर-रोधी टीका
भारत में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। देश में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के 80 लाख से ज़्यादा टीके लगाए जा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के…
भारत में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। देश में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के 80 लाख से ज़्यादा टीके लगाए जा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर बताया।
मंत्रालय ने अपने पोस्ट में कहा, "हर टीकाकरण के साथ, भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है।" यह टीकाकरण एचपीवी संक्रमण और उससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
क्या है HPV वैक्सीन और क्यों है ज़रूरी?
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) एक ऐसा वायरस है जो कई तरह के कैंसर का कारण बन सकता है, जिनमें सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा), गुदा (एनल) और गले का कैंसर प्रमुख हैं। यह जननांग में मस्से जैसी समस्याओं के लिए भी ज़िम्मेदार होता है। HPV वैक्सीन इन संक्रमणों को रोकने के लिए एक बेहद सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टीका उन हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन्स से बचाता है जो लगभग 90 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामलों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। यह न केवल लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि कैंसर से पहले शरीर में होने वाले कोशिकाओं के बदलाव को भी रोकता है।
टीकाकरण की सही उम्र और डोज़
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैक्सीन का सबसे ज़्यादा असर तब होता है जब इसे 9 से 14 साल की उम्र में दिया जाए। इस आयु वर्ग के लिए आमतौर पर दो डोज़ की ज़रूरत होती है, हालांकि भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सिंगल-डोज़ का तरीका भी अपनाया जा रहा है।
वहीं, 15 से 26 साल के लोगों के लिए 'कैच-अप' टीकाकरण के तौर पर छह महीने के भीतर तीन डोज़ दी जाती हैं। कुछ मामलों में 45 साल तक के वयस्क भी यह टीका लगवा सकते हैं। हालांकि, वायरस के संपर्क में आने से पहले टीका लगवाने पर इसका असर सबसे अच्छा होता है।
क्या यह वैक्सीन सुरक्षित है?
वैश्विक स्तर पर हुई व्यापक निगरानी से यह साबित हो चुका है कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे लंबे समय तक स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। इसके कुछ सामान्य और हल्के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान। ये लक्षण आमतौर पर कुछ ही समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
इनपुट: IANS



