बालाघाट: दूषित पानी और संक्रमण से कई आदिवासी बच्चों की मौत, दिग्विजय सिंह ने CM को पत्र लिख उच्च-स्तरीय जांच की मांग की
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल बिरसा ब्लॉक में दूषित पानी और संक्रमण के कारण कई बच्चों की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक बच्चे बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं। इस गंभीर स्थिति पर चिंता…
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल बिरसा ब्लॉक में दूषित पानी और संक्रमण के कारण कई बच्चों की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक बच्चे बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं। इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई और राज्य स्तरीय जांच की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, सिंह ने इसे गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया है।
पत्र में दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि पिछले एक सप्ताह में बिरसा ब्लॉक में 11 आदिवासी बच्चों की जान चली गई है, हालांकि जिला प्रशासन केवल सात मौतों की पुष्टि कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार बच्चों की मौत की जानकारी छिपाई जा रही है। बालाघाट जिला अस्पताल में 100 से अधिक बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से 40-50 की हालत नाजुक बनी हुई है और वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
प्रभावित क्षेत्र और दहशत का माहौल
प्रभावित गांव जिला मुख्यालय बालाघाट से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित हैं। पिछले दस दिनों से बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका जैसे गांवों और उनसे जुड़े टोलों-मजरों में हर दूसरे घर में बच्चे गंभीर बुखार से पीड़ित हैं, जिससे वहां दहशत का माहौल है। इन क्षेत्रों में मलेरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी और त्वचा रोगों का प्रकोप फैला हुआ है। सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उईके का हवाला देते हुए बताया कि जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड पूरी तरह भर चुका है।
सरकार पर सवाल और उठाए गए कदम
दिग्विजय सिंह ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ 6 अगस्त से 'जनविश्वास अभियान' चल रहा है और हाल ही में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया, वहीं दूसरी ओर विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति के परिवार इस संक्रमण की चपेट में हैं। उन्होंने सरकार के 'हर घर नल से जल' योजना पर 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिगड़ी नल-जल परियोजनाएं और दूषित जल स्रोत आदिवासियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस बीच, स्थानीय विधायक संजय उइके और बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने पीड़ित परिवारों और बच्चों से मुलाकात कर उनके उचित इलाज के लिए अधिकारियों से बात की है।
मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से कई मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही से हुई इस घटना की राज्य स्तर से जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये की राहत राशि दी जाए।
- गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल भेजा जाए और इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए।
- स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम के साथ प्रभावित गांवों का दौरा कर मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए जाएं।
इनपुट: IANS



