बद्रीनाथ मंदिर: जांच रिपोर्ट में दान की रकम में बार-बार चोरी का खुलासा, SIT ने सौंपे सुझाव
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में हुई कथित हेराफेरी के मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, 18 पन्
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम मंदिर में चढ़ावे की गिनती में हुई कथित हेराफेरी के मामले में गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, 18 पन्नों की इस रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई मौकों पर दान की रकम में हेराफेरी की थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, चार सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सीईओ को सौंप दी है।
यह मामला 2 जुलाई को सामने आया था, जब नगद चढ़ावे की गिनती के दौरान एक कर्मचारी को पैसों के साथ हेराफेरी करते हुए देखा गया था। इसके बाद बीकेटीसी ने 7 जुलाई को कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। समिति ने इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए एक चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।
जांच में क्या मिला?
जांच के दौरान टीम को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, हालांकि कुछ तकनीकी बाधाएं भी सामने आईं। जांच टीम को घटना के दिन यानी 2 जुलाई से केवल 14 दिन पहले तक के ही सीसीटीवी फुटेज मिल सके। इसकी वजह यह थी कि मंदिर में लगे कैमरों की स्टोरेज क्षमता सिर्फ 15 दिनों की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2 जुलाई के फुटेज में आरोपी साफ तौर पर पैसों की हेराफेरी करते हुए दिख रहा है। इसके अलावा, पिछले 14 दिनों के कुछ अन्य फुटेज भी जांच टीम को महत्वपूर्ण लगे हैं, जिनसे बार-बार चोरी होने का अंदेशा पुख्ता होता है।
भविष्य के लिए दिए गए सुझाव
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ घटना का ब्योरा ही नहीं दिया, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई ठोस सुझाव भी दिए हैं। कमेटी ने सिफारिश की है कि दान गिनती कक्ष में और अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इसके अलावा, मंदिर के परिक्रमा पथ पर मौजूद सभी ब्लाइंड स्पॉट (ऐसी जगहें जहां कैमरे की नजर नहीं पहुंचती) को भी पूरी तरह से सीसीटीवी कवरेज में लाने का सुझाव दिया गया है, ताकि व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जा सके।
इनपुट: IANS



