शनिवार, 20 जून 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

अयोध्या राम मंदिर की दान पेटियों में कथित गबन, SIT जांच से हड़कंप

अयोध्या के श्रीराम मंदिर की दान पेटिकाओं से धनराशि के कथित गबन का मामला सामने आने पर विशेष जांच दल पूछताछ और ऑडिट में जुटा है। SIT ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय व व्यवस्थापक गोपाल राव से पूछताछ की और रिकॉर्ड कब्जे में लिए। सीएम योगी ने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया, जबकि कई पक्षों ने FIR की मांग की है।

अयोध्या राम मंदिर की दान पेटियों में कथित गबन, SIT जांच से हड़कंप
AI जनित प्रतीकात्मक चित्र

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर से एक ऐसी वारदात की आहट सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक और धार्मिक तंत्र में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परिसर में लगी दान पेटिकाओं से जमा होने वाली धनराशि में कथित गबन की आशंका के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने मोर्चा संभाल लिया है। जांच के घेरे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की गई है।

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कैसे खुला कथित गड़बड़ी का सुराग

एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों की आय का करीब दो सप्ताह से आंतरिक ऑडिट कराया जा रहा है। इसी पड़ताल के दौरान एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया — श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद दान राशि में उस अनुपात में बढ़ोतरी दर्ज नहीं हो रही थी। इसी विसंगति ने शक की सुई घुमा दी।

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि धनराशि में हेराफेरी लंबे समय से सुनियोजित ढंग से की जा रही थी। निगरानी व्यवस्था और गोपनीय सूचना के आधार पर इस कथित गड़बड़ी का पता चला। उल्लेखनीय है कि दानपात्रों से नकदी निकालने और गिनती के लिए दो शिफ्टों में काम होता है, जिसमें ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और एक कलेक्शन एजेंसी के करीब 40 कर्मचारी तैनात रहते हैं।

SIT की दबिश और दस्तावेज़ कब्जे में

राज्य सरकार ने मामले की पड़ताल के लिए विशेष जांच दल गठित किया है। इसमें ये अधिकारी शामिल हैं:

  • लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत
  • आईजी किरण एस.
  • विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार

SIT ने मंदिर परिसर में सघन जांच की और कृष्णदेव तिवारी (आभूषण कक्ष प्रभारी) समेत संबंधित व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को खंगाला। जांच दल ने CCTV फुटेज, दानपात्रों और नकदी गिनती से जुड़े सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। चंपत राय और गोपाल राव से विस्तृत पूछताछ की गई है। फिलहाल पुलिस द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

FIR की मांग और राजनीतिक तपिश

इस मामले ने जल्द ही तूल पकड़ लिया। मिली जानकारी के मुताबिक तीन अलग-अलग पक्षों ने FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर सौंपी है:

  • शिवसेना के संतोष दुबे
  • युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष शरद शुक्ला
  • करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू

वहीं कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में सर्वदलीय जांच समिति बनाने या मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब तक इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध रखी है।

आरोप और प्रतिक्रिया

जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम ने आरोप लगाया कि चंपत राय के संरक्षण में कथित भ्रष्टाचारियों ने हेराफेरी की और इसके चलते एक टैक्सी चालक करोड़पति बन गया। उन्होंने चंपत राय को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। यह सभी फिलहाल आरोप के स्तर पर हैं और किसी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जून 2026 को अयोध्या दौरे के दौरान इस मामले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ रही है और "दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा"। मुख्यमंत्री के अनुसार जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा, साथ ही राम मंदिर की गरिमा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रशासन की दूरी की रणनीति

रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री के अयोध्या कार्यक्रम के दौरान चंपत राय को आयोजन से दूर रखने और उनके स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का अनुरोध किया गया था। इसी अवधि में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का भी अयोध्या दौरा रहा और मुख्यमंत्री ने करीब 245 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण किया।

आगे क्या

दान पेटिका जैसी आस्था से जुड़ी व्यवस्था में कथित गड़बड़ी का सामने आना अपने आप में संवेदनशील मामला है। SIT की पड़ताल अभी जारी है और जब्त रिकॉर्ड व CCTV फुटेज के विश्लेषण के बाद ही तस्वीर साफ होगी। FIR दर्ज होने या न होने तथा जांच के निष्कर्ष पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं।

News4Social यूपी डेस्क

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