अरुणाचल में चीनी सेना की कथित गतिविधियों पर CPI ने जताई चिंता, सरकार से संवाद और कूटनीति की अपील
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी के महासचिव डी. राजा ने केंद्र सरकार से इस संवेदनशील…
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी के महासचिव डी. राजा ने केंद्र सरकार से इस संवेदनशील मुद्दे को टकराव के बजाय कूटनीति और संवाद के माध्यम से हल करने का आग्रह किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीपीआई ने इस मुद्दे के साथ-साथ प्रधानमंत्री के हालिया बयानों और चुनाव सुधारों की आवश्यकता को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है।
डी. राजा ने कहा कि अगर चीनी सैनिकों की आवाजाही की खबरें सच हैं, तो भारत सरकार को इसकी जानकारी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत और चीन, दोनों बहुत करीबी पड़ोसी हैं। अगर कुछ समस्याएं और विवाद सामने आते हैं, तो दोनों देशों को बातचीत के लिए बैठना चाहिए। उन्हें कूटनीति और संवाद के जरिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।" राजा के अनुसार, सरकार को यह मुद्दा चीन के समक्ष उठाकर बिना किसी सैन्य टकराव के समाधान निकालना चाहिए।
क्षेत्रीय अखंडता और संवाद पर जोर
पार्टी के राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की क्षेत्रीय अखंडता की हर कीमत पर रक्षा होनी चाहिए और इस मामले में वे सरकार और सशस्त्र बलों के साथ हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा, "संवाद और बातचीत ही रास्ता है।" कुमार ने ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का उल्लेख करते हुए कहा कि द्विपक्षीय बातचीत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और किसी को भी तनाव बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।
चुनाव सुधार और प्रधानमंत्री के बयान पर भी सवाल
डी. राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकतंत्र की जननी कहे जाने वाले भारत में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बात करनी चाहिए। राजा ने कहा, "हम भी भाजपा और आरएसएस के गठजोड़ से देश को मुक्त कराने के लिए लड़ रहे हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि मौजूदा सरकार भारत के संविधान, लोकतंत्र और इसकी बहुलतावादी संरचना के लिए खतरा पैदा कर रही है।"
वहीं, सांसद संतोष कुमार ने चुनाव सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के नियंत्रण में काम कर रहा है और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कुमार के मुताबिक, "इन जायज चिंताओं का समाधान करने के बजाय प्रधानमंत्री देश का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले लोकतंत्र की रक्षा जरूरी है, उसके बाद ही सत्ता परिवर्तन की बात प्रासंगिक होगी।
इनपुट: IANS



