सोमवार, 7 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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वृंदा करात का केंद्र पर आरोप: आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर 'बुलडोजर' चल रहा है

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने केंद्र सरकार की नीतियों को आदिवासी विरोधी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। नई दिल्ली में आयोजित आदिवासियों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के…

वृंदा करात का केंद्र पर आरोप: आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर 'बुलडोजर' चल रहा है
(फोटो: IANS)

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने केंद्र सरकार की नीतियों को आदिवासी विरोधी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। नई दिल्ली में आयोजित आदिवासियों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों के खिलाफ एक 'अघोषित युद्ध' चला रही है और उनके संवैधानिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वृंदा करात ने इस सम्मेलन को संघर्ष के आह्वान का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा, "ये बहुत ही महत्वपूर्ण सम्मेलन है। देश के अलग-अलग गांव और प्रदेशों से आदिवासियों के प्रतिरोध संघर्ष, अपने जल, जंगल, और जमीन के लिए लड़ा जा रहा है, के प्रतिनिधि एक मंच पर आए हैं।"

शिक्षा और संस्कृति पर सवाल

करात ने आदिवासी शिक्षा की स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने एकलव्य मॉडल स्कूलों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के दावों के विपरीत आधे से ज़्यादा घोषणाएं अमल में नहीं लाई जा रही हैं। उनके मुताबिक, जेन-जी की बात तो होती है, लेकिन आदिवासी जेन-जी के हॉस्टल और स्कूलों की हालत बेहद खराब है।

उन्होंने यह भी कहा कि जो थोड़ी-बहुत शिक्षा दी जा रही है, वह आदिवासी संस्कृति, भाषा, इतिहास और परंपरा से दूर है, जो उनकी पहचान मिटाने की कोशिश जैसा है।

'नीति बदलने का संघर्ष'

वृंदा करात ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करने का एक जरिया है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नीतियों में संशोधन कर आदिवासियों के हकों को कमजोर कर रही है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, "इसलिए ये संघर्ष का आह्वान है। ये नीति बदलने और अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष का सम्मेलन है। जब तक जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।" करात ने यह भी कहा कि आदिवासी अपने बीच हिंदुत्व की बातों को पसंद नहीं कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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