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आज का एक्सप्लेनर: धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देने वाले, 4 संकेत समझिए; आखिर कॉकरोच जनता पार्टी उन्हीं के पीछे क्यों पड़ी

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आज का एक्सप्लेनर:  धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देने वाले, 4 संकेत समझिए; आखिर कॉकरोच जनता पार्टी उन्हीं के पीछे क्यों पड़ी

आज का एक्सप्लेनर: धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देने वाले, 4 संकेत समझिए; आखिर कॉकरोच जनता पार्टी उन्हीं के पीछे क्यों पड़ी

कॉकरोच जनता पार्टी के पहले जमीनी प्रोटेस्ट की इकलौती मांग है- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो! NEET पेपर लीक को 5 हफ्ते और CBSE मार्किंग में गड़बड़ी को 3 हफ्ते हो गए। विपक्षी पार्टियां भी लगातार शिक्षामंत्री को हटाने की मांग कर रही हैं। लेकिन क्या धर्में

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फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। आज के एक्सप्लेनर में पैटर्न, संकेत और एक्सपर्ट्स के हवाले से पूरी कहानी…

4 संकेतों से समझिए…

1. बीजेपी सरकार में इस्तीफे नहीं होते

  • 2015 की बात है। विवाद शुरू हुआ कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने लंदन में रह रहे भगोड़े ललित मोदी की वहां से पुर्तगाल जाने में मदद की है। सुषमा और वसुंधरा के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठ रही थी।
  • तब 24 जून 2015 को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान दिया- ‘नहीं… नहीं इसमें (मोदी सरकार में) मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया। यूपीए सरकार नहीं है, ये एनडीए सरकार है।’ राजनाथ का यही बयान बीजेपी सरकार का अघोषित नियम बना हुआ है।
  • पॉलिटिकल एनालिस्ट रशीद किदवई बताते हैं कि मोदी सरकार में किसी मंत्री के इस्तीफा न देने का इतिहास रहा है। सिर्फ एमजे अकबर का मामला छोड़ दें तो। 2018 में #MeeToo मामले में एम.जे. अकबर ने विदेश राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
  • नवंबर 2021 में भी विपक्ष ने गड़बड़ी, भ्रष्टाचार जैसे आरोपों का सामना कर रहे बीजेपी नेताओं के इस्तीफे की मांग की। वरना संसद नहीं चलने देने की धमकी दी। तब भी मोदी सरकार ने विपक्ष को संदेश भिजवा दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा।

2010 में IPL चेयरमैन रहा ललित मोदी भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद देश छोड़कर इंग्लैंड भाग गया था। अभी भी वहीं रहता है।

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2. इस्तीफे का राजनीतिक मतलब निकलेगा कि सरकार से गलती हुई

  • सीनियर जर्नलिस्ट नीरजा चौधरी के मुताबिक, ‘यूपीए के दौर में अशोक चह्वाण से शुरू होकर कई लोगों को इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में यूपीए सरकार ऐसे दबावों को संभाल नहीं पाई। मोदी सरकार उसी से सबक लेती दिखती है। इनकी रणनीति और विश्वास है कि हमें जो करना है, हम वो करेंगे।’
  • रशीद किदवई कहते हैं कि अगर सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो ये मैसेज जा सकता है कि सरकार से गलती हुई है। लेकिन मोदी सरकार में ऐसा होना मुश्किल है। सरकार किसी तरह से ये नहीं दिखाना चाहती है कि उसने किसी दबाव या आरोप के चलते अपने मंत्री का इस्तीफा लिया। अभी सरकार पर इतना ज्यादा दबाव भी नहीं है।’
  • सीनियर जर्नलिस्ट अजय सिंह के मुताबिक, मांग पर न लोग रखे जाते हैं और न इस्तीफे होते हैं। हां, अगर कोई जांच एजेंसी आरोप लगाती है, तब स्थिति अलग हो जाती है।

3. धर्मेंद्र प्रधान की ‘डिलीवरी लीडर’ वाली छवि, PMO के करीबी

  • मई 2014 में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल से ही धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हैं। पहले उन्होंने पेट्रोलियम, कौशल विकास और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। 2021 से शिक्षा मंत्री हैं।
  • मई 2016 में पीएम मोदी ने गरीब महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन देने के लिए फ्लैगशिप स्कीम ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ लॉन्च की। इसकी पूरी जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास थी। तब इसके मंत्री थे- धर्मेंद्र प्रधान।
  • आज इसके तहत 10.55 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन बांटे जा चुके हैं। सबसे लंबे वक्त, यानी 7 साल तक पेट्रोलियम मंत्री रहे प्रधान की छवि उज्ज्वला योजना के चलते एक ‘डिलीवरी लीडर’ के तौर पर बनी।
  • 2020 में ‘नई शिक्षा नीति’ भी धर्मेंद्र प्रधान की निगरानी में बनी। ये भी पीएम मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था। धर्मेंद्र प्रधान को PMO और बीजेपी की टॉप लीडरशिप का भरोसेमंद माना जाता है।
  • प्रधान की एक और खासियत है कि वे मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं। उनकी छवि बेहद गंभीर, लो-प्रोफाइल और बेतुकी बातों से दूर रहने वाले नेता की है।
  • सरकार के साथ-साथ प्रधान ने संगठन में भी काम किया। उन्होंने उत्तराखंड (2017), कर्नाटक (2018), उत्तर प्रदेश (2022), ओडिशा (2024), बिहार (2025) जैसे विधानसभा चुनावों में अहम जिम्मेदारियां संभाली।

6 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक पोस्टर।

4. इस्तीफे की जगह सिस्टम सुधारने का नैरेटिव

सरकार ये नैरेटिव बना रही है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जगह, सिस्टम को सुधार रहे हैं। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं…

  • NEET 2026 पेपर लीक मामले में CBI, राजस्थान SOG और राज्यों की पुलिस जांच कर रही है। अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें NTA की पेपर-सेटिंग कमेटी से जुड़े दो एक्सपर्ट भी हैं- पुणे में बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और केमिस्ट्री के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी।
  • NTA ने 3 मई का एग्जाम कैंसिल कर दिया है और 21 जून को फिर से एग्जाम कराने वाली है। शिक्षा मंत्रालय के अलावा PMO और रक्षा मंत्रालय भी रि-एग्जाम की निगरानी कर रहे हैं।
  • 21 जून को दोबारा होने वाले एग्जाम क्वेश्चन पेपर की सेटिंग से लेकर छपाई, ट्रांसपोर्टेशन और डिलीवरी की प्रक्रिया में सेना और वायुसेना को शामिल किया जाएगा।
  • NTA को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 2 जॉइंट सेक्रेटरी- अनुजा बापट और रुचिरा विज, 2 नए जॉइंट डायरेक्टर- आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगढिया को एजेंसी में नियुक्त किया है।
  • 28 मई को धर्मेंद्र प्रधान ने खुद इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने माना कि 17 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख कॉपियों को स्कैन करने में गंभीर खामियां रहीं।
  • CBSE के पोर्टल की सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए IIT मद्रास और कानपुर के डायरेक्टर और उनकी टीम काम कर रही है।
  • OSM के टेंडर प्रोसेस की गड़बड़ियों की तह तक जाने के लिए जांच कमेटी बनाई गई है। कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की अध्यक्ष एस राधा चौहान को इस कमेटी की कमान सौंपी गई है। ये एक महीने में रिपोर्ट देगी।

CBSE के 12th बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में गड़बड़ी के विवाद में बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता को हटा दिया है।

7 जुलाई 2021 से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री हैं। राहुल गांधी का कहना है कोई एग्जाम ईमानदारी से नहीं हुआ। 1 करोड़ बच्चों पर असर पड़ा है। पूरी शिक्षा व्यवस्था बर्बाद कर दी है। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, अब तक 5 स्टूडेंट सुसाइड कर चुके हैं।’

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 5 बड़े एग्जाम में गड़बड़ियों के आरोप लगते हैं…

1. NEET 2024 में गड़बड़ी, पेपर लीक

  • 5 मई 2024 को करीब 24 लाख से ज्यादा बच्चों ने NEET-UG 2024 का एग्जाम दिया। 4 जून को नतीजे आए, तो 67 स्टूडेंट्स को 720 में से पूरे 720 अंक मिले। इनमें 6 बच्चे हरियाणा के झज्जर के एक ही सेंटर के थे। बच्चों और टीचर्स ने गड़बड़ी और पेपर लीक का आरोप लगाया।
  • देश के कई हिस्सों में स्टूडेंट्स और छात्र संगठनों ने प्रोटेस्ट किया। सदन से लेकर सड़क तक चर्चा हुई।
  • फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1,500 से ज्यादा स्टूडेंट्स का रीएग्जाम हुआ। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा- पेपर लीक निर्विवाद रूप से सही है।
  • CBI ने जांच की और पेपर लीक का मास्टरमाइंड गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि कोचिंग नेटवर्क से लेकर बिचौलियों तक ने पेपर लीक कराया। रिक्रूटमेंट एग्जाम की जिम्मेदारी NTA से ले ली गई। तय हुआ कि अब NTA सिर्फ NEET जैसे एंट्रेंस एग्जाम करवाएगा।

2. UGC NET 2024 में गड़बड़ी

  • 18 जून 2024 को NTA ने UGC-NET 2024 का ऑफलाइन एग्जाम करवाया। जूनियर रिसर्च फेलोशिप, असिस्टेंट प्रोफेसरशिप और पीएचडी में एंट्रेंस के लिए करीब 9 लाख स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया। परीक्षा वाले दिन दोपहर करीब 3 बजे पता चला कि पेपर टेलीग्राम पर 5-6 लाख रुपए में बेचा जा रहा था।
  • शिक्षा मंत्रालय ने UGC-NET 2024 परीक्षा रद्द कर दी और मामला CBI को सौंप दिया। 20 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक की बात स्वीकारी। 21 अगस्त से 4 सितंबर 2024 के बीच कंप्यूटर-आधारित CBT फॉर्मेट में दोबारा एग्जाम करवाया गया।
  • हालांकि CBI ने स्पेशल कोर्ट में जांच की क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला।

संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में NTA के जरिए हुए 14 एग्जाम में से कम से कम 5 में पेपर लीक, पेपर में गलतियां, रिजल्ट में देरी जैसी दिक्कतें हुईं। UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG के एग्जाम रोकने पड़े और CUET-UG और PG का रिजल्ट आने में देरी हुई।

3. NEET 2026 पेपर लीक

  • 3 मई 2026 को 22.79 लाख छात्रों ने NEET-UG 2026 का ऑफलाइन एग्जाम दिया। 7 मई को खबर आई कि क्वेश्चन-पेपर सोशल मीडिया पर एग्जाम से पहले ही लीक हो चुका था।
  • पेपर लीक करने में NTA के अंदर के 3 लोग शामिल थे- CBI ने पुणे के रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर P.V. कुलकर्णी, पुणे की बायोलॉजी की टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पुणे की ही फिजिक्स की टीचर मनीषा संजय हवालदार।
  • इन लोगों के जरिए एग्जाम से पहले ही सवालों का एक ‘गेस पेपर’ तैयार हुआ, जिसे 15 लाख रुपए तक में बेचा गया। पेपर खुलेआम व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैनल्स पर भी शेयर किया जा रहा था।

नीट पेपर लीक के विरोध में पिछले महीने देशभर में प्रदर्शन हुए हैं।

4. CBSE 12th बोर्ड मार्किंग में गड़बड़ी

  • कुल 17.68 लाख छात्रों ने 2026 की CBSE 12th बोर्ड के एग्जाम दिए। रिजल्ट आया तो, पिछली बार के 88.39% के मुकाबले 85.2% स्टूडेंट्स ही पास हुए। 22% यानी 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने कॉपी दोबारा जांचने यानी री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया।
  • कई स्टूडेंट्स ने मार्किंग में गड़बड़ी के चलते कम नंबर आने की शिकायत की।
  • दरअसल, CBSE ने पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग, OSM नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। तर्क दिया कि इससे चेकिंग ज्यादा तेज और सटीक होती है और डेटा एंट्री की गड़बड़ियों में कमी आती है।
  • CBSE ने OSM के जरिए कॉपी जांचने का ठेका ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ नाम की हैदराबाद बेस्ड कंपनी को दिया था, जो तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है।
  • 2019 में इसका नाम ‘ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड’ था। तब इसपर तेलंगाना में 12th बोर्ड एग्जाम में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। वहां 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे।
  • विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ को ठेका देने के लिए नियमों में ढील दी गई और TCS जैसी बेहतर कंपनियों को दरकिनार किया गया।
  • ये भी आरोप लगा कि ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ के डायरेक्टर राधाकृष्णन जयरामन अमेरिका में पढ़ाई के लिए गई धर्मेंद्र प्रधान की बेटी निमिषा प्रधान के लोकल गार्डियन थे।

झारखंड के 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने CBSE के टेंडर प्रोसेस में 15 से ज्यादा गड़बड़ियां उजागर की हैं।

5. CUET 2026 में गड़बड़ी

  • 30 मई को CUET UG की पहली शिफ्ट में तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई सेंटर्स पर एग्जाम ढाई घंटे देर से शुरू हुआ। एग्जाम में तकनीकी सपोर्ट का जिम्मा TCS का था। छात्रों को तकनीकी गड़बड़ी के बारे में नहीं बताया गया।
  • करीब 3,765 छात्र ऐसे थे, जिन्होंने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन तो पूरा किया था, लेकिन एग्जाम नहीं दे सके।
  • NTA ने गलती मानी और कहा कि इन छात्रों को दोबारा परीक्षा का मौका मिलेगा।
  • इसके अलावा 13 जनवरी 2026 को शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन, यानी UGC ने यूनिवर्सिटीज में कथित जातीय भेदभाव को लेकर विवादित नियम नोटिफाई किए थे। देशभर के सवर्णों ने इसका विरोध किया।
  • 27 जनवरी को धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि न भेदभाव होगा और न ही कोई कानून का दुरुपयोग कर सकता है।’ हालांकि 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर स्टे लगाते हुए कहा कि 2012 के पुराने UGC रेगुलेशंस ही लागू रहेंगे। ये इस साल का पहला मामला था, जिसमें प्रधान से इस्तीफा मांगा गया था।

चर्चा है कि 15 जून के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल और बीजेपी के संगठन में बदलाव होने वाला है। सरकार के सामने 2 विकल्प हैं…

  1. धर्मेंद्र प्रधान को सरकार से संगठन की ओर शिफ्ट किया जाए।
  2. शिक्षा मंत्रालय के बजाय किसी अन्य मंत्रालय का जिम्मा दिया जाए।

ऐसा पहले भी हो चुका है… नवंबर 2014 में सुरेश प्रभु को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में कई रेल हादसे हुए, जिनको लेकर विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की। अगस्त 2017 में प्रभु ने इस्तीफे पेशकश भी की। मोदी सरकार में ऐसा करने वाले प्रभु इकलौते मंत्री हैं।

हालांकि सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया। एक महीने बाद उन्हें कॉमर्स मिनिस्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया। वे 2 साल तक मंत्री रहे। 2019 के बाद वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी के पास थी। तब इस मंत्रालय का नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय था। कुर्सी संभालते ही स्मृति सुर्खियों में आ गईं। वजह उनकी डिग्री और रोहित वेमुला सुसाइड मामला और JNU में ‘भारत विरोधी नारे’ जैसे मामलों में उनके बयान।

विपक्षी दलों से लेकर सोशल मीडिया तक स्मृति का इस्तीफा मांगे जाने लगा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। 2016 में कैबिनेट में बदलाव हुआ, तो स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया। बाद में उन्होंने महिला बाल विकास, सूचना एवं प्रसारण, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालाय मिले, लेकिन 2024 में वे मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाईं।

मई 2014 से अब तक मोदी सरकार में 4 बार बड़े बदलाव हुए हैं, जिनमें मंत्रियों के इस्तीफे या विभाग बदले गए और नए चेहरे जोड़े गए।

सबसे बड़ा बदलाव जुलाई 2021 में हुआ, जब 12 सीनियर कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को हटाया गया था। इनमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसी बदलाव में धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोट कर शिक्षा मंत्री बनाया गया था।

रशीद किदवई बताते हैं, ‘मोदी सरकार ऐसी कोई नजीर नहीं बनाना चाहती है कि दबाव में मंत्री का इस्तीफा हुआ। अगर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, तो सरकार इसे रूटीन प्रोसेस की तरह पेश कर सकती है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट रिशफल हो सकता है। कुछ लोग संगठन में जाएंगे, कुछ लोग सरकार में आएंगे।’

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