सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट में भ्रष्टाचार, भेदभाव के आरोप: बहुजन अधिकार सेना ने अयोध्या आयुक्त से रखी उच्च स्तरीय जांच की मांग – Sultanpur News h3>
सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट और तहसील परिसरों में लंबे समय से कार्यरत कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इन पर संभावित भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं। बहुजन अधिकार सेना के प्रदेश अध्यक्ष ध्रुव नारायण विश्वकर्मा ने बुधवार को अयोध्या मंडल के आयुक्त को एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें कलेक्ट्रेट के प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस ज्ञापन के बाद कलेक्ट्रेट से लेकर तहसील स्तर तक हड़कंप मच गया है। शिकायत पत्र में कलेक्ट्रेट में तैनात नायब नाजिर अल्जेंद्र सिंह पर विशेष रूप से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पिछले कई दशकों से कलेक्ट्रेट में उनका एकतरफा प्रभाव बना हुआ है। उनके कथित रसूख के कारण विभिन्न पटलों और सेक्शनों पर कर्मचारियों की तैनाती प्रभावित होती है। जो भी कर्मचारी उनके प्रभाव से बाहर काम करने का प्रयास करता है, उसका तबादला तहसीलों या कम महत्व वाले पटलों पर करा दिया जाता है। शिकायत होने पर वीआरएस का हवाला देकर मामले को टालने और प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने के आरोप भी हैं। ज्ञापन में अल्जेंद्र सिंह की चल-अचल संपत्ति, कॉल डिटेल्स और होमगार्ड जवानों को निजी सुरक्षा में लगाने की जांच की मांग की गई है। दूसरा प्रमुख मामला अयोध्या मंडल द्वारा लगभग चार साल पहले नियुक्त किए गए विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) हरदेव सिंह से संबंधित है। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण ओएसडी हरदेव सिंह के साथ प्रशासनिक स्तर पर सुनियोजित तरीके से भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें उनके पद के अनुरूप कार्य नहीं सौंपे गए हैं। इसके विपरीत, नियमों की अनदेखी कर स्टेनो उमेश सिंह द्वारा ओएसडी के कार्यों का निर्वहन किया जा रहा है, जो प्रशासनिक असंतुलन और मनमानी को दर्शाता है। शासन के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को एक पटल पर अधिकतम तीन से पांच वर्ष से अधिक नहीं रखा जा सकता। हालांकि, सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट में इस नीति का उल्लंघन करने के आरोप हैं। शिकायत में कहा गया है कि अल्जेंद्र सिंह और उमेश सिंह जैसे प्रभावशाली कर्मचारी केवल नाम के लिए पटल बदलते हैं, जबकि उनका वास्तविक नियंत्रण और वर्चस्व वर्षों से यथावत बना हुआ है। बहुजन अधिकार सेना ने इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ने के लिए आयुक्त से मांगें की हैं। पूरे प्रकरण की विजिलेंस, एसआईटी (SIT) या किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। संबंधित कर्मचारियों की आय के स्रोतों, चल-अचल संपत्तियों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की सघन जांच हो। सुरक्षा के नाम पर होमगार्ड जवानों के निजी उपयोग की जांच कर उनका केवल सरकारी कार्यों में उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अनुसूचित जाति के अधिकारी के साथ हुए जातिगत भेदभाव और मानसिक शोषण की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सालों से एक ही जगह जमे प्रभावशाली कर्मचारियों का निष्पक्षता से रोटेशन और स्थानांतरण किया जाए।
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