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562 करोड़ से तैयार होगा प्लांट: डंपिंग यार्ड में ही 55 बीघा जमीन पर बनेगा; रोज 60 टन कचरे के निस्तारण की तैयारी – Barmer News

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562 करोड़ से तैयार होगा प्लांट:  डंपिंग यार्ड में ही 55 बीघा जमीन पर बनेगा; रोज 60 टन कचरे के निस्तारण की तैयारी – Barmer News

562 करोड़ से तैयार होगा प्लांट: डंपिंग यार्ड में ही 55 बीघा जमीन पर बनेगा; रोज 60 टन कचरे के निस्तारण की तैयारी – Barmer News


शहर के गेहूं रोड स्थित डंपिंग यार्ड में जमा कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण को लेकर नगर परिषद ने नई कार्ययोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली है। शहर में 60 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) प्लांट बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए 562.74 लाख रुपए की परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। प्लांट का निर्माण डंपिंग यार्ड के लिए आवंटित 100 बीघा जमीन में से शेष बची 55 बीघा भूमि पर प्रस्तावित किया गया है। नगरपरिषद एक्सईएन सूर्यप्रकाश संचेती ने बताया कि नगरपरिषद क्षेत्र में 60 टन कचरे को ध्यान में रखते हुए म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) प्लांट का डिजाइन तैयार किया गया है। 562.74 लाख रुपए की लागत से तैयार होने वाले इस प्लांट को वर्तमान और भविष्य की जरुरतों को देखते हुए बनाया जाएगा। इसके लिए 55 बीघा जमीन भी प्रस्तावित है। इस प्लांट के निर्माण के लिए टेंडर लगा हुआ है। जल्द ही इस प्लांट का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
भविष्य की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन बनाई नगर परिषद क्षेत्र में रहने वाले कुल 1.75 लाख लोगों द्वारा फैलाए जाने वाले कचरे को आधार मानते हुए इस प्लांट को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इस दूरगामी योजना का उद्देश्य यह है कि वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी बढ़ती आबादी के बाद आमजन को इस प्लांट के कारण किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्लांट परिसर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ बड़े स्तर पर ग्रीन प्लांट डेवलपमेंट भी किया जाएगा, ताकि आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बना रहे । अनुबंध में शामिल है 20 साल के संचालन की शर्त पूर्व में स्वायत्त शासन विभाग स्तर पर दो बार टेंडर प्रक्रिया आयोजित की जा चुकी है, लेकिन तकनीकी कारणों और सिंगल टेंडर जैसी दिक्कतों की वजह से काम शुरू नहीं हो सका था। नगर परिषद प्रशासन के अनुसार इस बार जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर धरातल पर काम शुरू करवाया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि टेंडर की शर्तों के अनुसार, निर्माण करने वाली संबंधित फर्म द्वारा ही आगामी 20 साल तक इस प्लांट का संचालन किया जाएगा। कंपनियों को ईंधन के लिए मिलेगा आरडीएफ प्रस्तावित प्लांट में शहर से रोजाना एकत्र होकर आने वाले कचरे को आधुनिक मशीनों के जरिए दो हिस्सों सूखे और गीले कचरे में अलग-अलग कर उसका निस्तारण किया जाएगा। इसमें से सूखे कचरे को प्रोसेस करके रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल तैयार किया जाएगा। इस आरडीएफ का उपयोग बड़ी कंपनियों, पावर प्लांट और सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में किया जाएगा।

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