कवि कटियार के संग्रह ‘शब्द स्तब्ध हैं’ का विमोचन: लखनऊ में साहित्य, प्रतिरोध और संवेदनाओं की आवाज एक मंच पर – Lucknow News h3>
लखनऊ के निराला सभागार में शनिवार को कवि भगवान स्वरूप कटियार के नौवें कविता संग्रह ‘शब्द स्तब्ध हैं’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, प्रतिरोध और संवेदनाओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन जन संस्कृति मंच, आस, डॉक्टर राही मासूम रज़ा साहित्य एकेडमी और इप्टा ने किया था, जिसकी अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता वंदना मिश्र ने की। कार्यक्रम के दौरान कवि भगवान स्वरूप कटियार ने अपने नए संग्रह ‘शब्द स्तब्ध हैं’ से चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। उनकी कविताओं में प्रेम, प्रतिरोध, त्रासदी और सामाजिक बेचैनी के विभिन्न पहलू सामने आए। श्रोताओं ने कविताओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी सराहना की। घटनाओं की पीड़ा को दर्ज किया गया कवि-आलोचक कौशल किशोर ने कटियार की कविताओं को ‘समय और विचार की सृजनात्मक यात्रा’ बताया। उन्होंने कहा कि इस संग्रह में पुलवामा, पहलगाम, अहमदाबाद विमान हादसा, गाजा और मणिपुर जैसी घटनाओं की पीड़ा को दर्ज किया गया है। किशोर ने यह भी बताया कि फूलन देवी को समर्पित यह संग्रह अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज़ है। प्रोफेसर अनिल त्रिपाठी ने भगवान स्वरूप कटियार को ‘सरल शब्दों में बड़ी बातें कहने वाले कवि’ के रूप में वर्णित किया। उन्होंने संग्रह की कविता ‘खिड़की’ को मर्मस्पर्शी बताया और कहा कि कविताओं में कटियार की यात्राओं और अनुभवों की झलक साफ दिखाई देती है। ये पुस्तक ‘मानवीय संवेदनाओं का मजबूत दस्तावेज’ डॉ. अवंतिका सिंह ने ‘शब्द स्तब्ध हैं’ को ‘मानवीय संवेदनाओं का मजबूत दस्तावेज’ बताया। उन्होंने गाजा पर लिखी कविता को संग्रह की सबसे प्रभावशाली रचना कहा और कवि के पालतू साथी ‘कोको’ पर लिखी कविता का भी विशेष उल्लेख किया। रंगकर्मी राकेश वेदा ने कहा कि कटियार हमेशा बेबाक लेखन के समर्थक रहे हैं। आलोचक नलिन रंजन सिंह ने उनकी कविताओं को ‘बदलाव और बेचैनी का दस्तावेज’ बताया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में वंदना मिश्र ने टिप्पणी की कि ‘आज शब्दों के अर्थ बदले जा रहे हैं, ऐसे दौर में कटियार की कविताएं सच बोलने का साहस देती हैं।’ उन्होंने मणिपुर पर लिखी कविताओं को विशेष रूप से मार्मिक बताया।
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