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रन की जंग में कौन टिकेगा? RCB और गुजरात में हाई-वोल्टेज भिड़ंत आज

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रन की जंग में कौन टिकेगा? RCB और गुजरात में हाई-वोल्टेज भिड़ंत आज


रन की जंग में कौन टिकेगा? RCB और गुजरात में हाई-वोल्टेज भिड़ंत आज

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटन्स (GT) शुक्रवार को आईपीएल के एक अहम मुकाबले में आमने-सामने होंगे. यह सिर्फ दो टीमों की टक्कर नहीं, बल्कि दो ऐसे बल्लेबाजी क्रमों की परीक्षा है जो पिछले मैचों में सवालों के घेरे में रहे हैं.

चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच, जो आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती है, इस बार थोड़ी चिपचिपी और चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. यही वजह है कि आरसीबी को अपने पिछले मैच में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ करारी हार झेलनी पड़ी थी. उस मुकाबले में टीम का शीर्ष क्रम बिखर गया और पूरा बल्लेबाजी ढांचा सिर्फ फिल सॉल्ट को छोड़कर लड़खड़ा गया. परिणाम- छह विकेट से हार और आरसीबी को सीजन की दूसरी शिकस्त मिली.

इस हार ने आरसीबी की लय पर भी असर डाला है. 8 अंकों के साथ टीम अभी तीसरे स्थान पर है, लेकिन उसके ठीक पीछे सनराइजर्स हैदराबाद (8 अंक), चेन्नई सुपर किंग्स, दिल्ली कैपिटल्स, गुजरात टाइटन्स (6-6 अंक) लगातार दबाव बनाए हुए हैं. यानी अब एक भी चूक सीधे प्लेऑफ की तस्वीर को प्रभावित कर सकती है.

मौजूदा चैम्पियय आरसीबी को अच्छी तरह पता है कि अब हर मैच ‘मिनी फाइनल’ जैसा है. खासकर तब, जब उसके अधिकतर मुकाबले बाहर के मैदानों पर होने हैं और घरेलू फायदा भी सीमित होता जा रहा है. चिन्नास्वामी में यह मुकाबला फैन्स के लिए एक तरह की विदाई जैसा भी है, जिसे आरसीबी जीत के साथ यादगार बनाना चाहेगी.

लेकिन इसके लिए बल्लेबाजी में बड़ा बदलाव जरूरी है. पिछले मुकाबले में रजत पाटीदार और टिम डेविड जैसे विस्फोटक बल्लेबाज भी परिस्थितियों के सामने बेबस नजर आए. यही आरसीबी के लिए सबसे बड़ा चिंता का कारण है क्योंकि आक्रामकता तो है, लेकिन उसके साथ जरूरी निरंतरता गायब दिख रही है.

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अब RCB के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘प्लान बी’ तैयार करना है. सिर्फ बड़े शॉट्स पर निर्भर रहने की बजाय परिस्थितियों के अनुसार टिककर खेलना और साझेदारियां बनाना.

दूसरी तरफ गुजरात टाइटन्स भी कम दबाव में नहीं है. मुंबई इंडियंस के खिलाफ पिछले मैच में उसकी पूरी टीम सिर्फ 100 रनों पर ढेर हो गई थी. यह न सिर्फ शर्मनाक हार थी, बल्कि नेट रन रेट पर भी भारी चोट थी.

हालांकि कप्तान शुभमन गिल और जोस बटलर ने कुछ मौकों पर जिम्मेदारी दिखाई है, लेकिन बी साई सुदर्शन, ग्लेन फिलिप्स और राहुल तेवतिया जैसे बल्लेबाज अब तक अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं.

गुजरात की ताकत उसकी गेंदबाजी रही है. प्रसिद्ध कृष्णा, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज और राशिद खान जैसे नाम किसी भी बल्लेबाजी लाइनअप को तहस-नहस करने में सक्षम हैं. लेकिन गेंदबाजों का यह दम तभी काम आएगा जब स्कोरबोर्ड पर सम्मानजनक रन खड़े हों.

फिलहाल दोनों टीमों की कहानी एक जैसी है. गेंदबाजी मजबूत, लेकिन बल्लेबाजी अनिश्चित. ऐसे में शुक्रवार का मुकाबला सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दिशा तय करने का भी होगा. अब देखना यह है कि चिन्नास्वामी की शाम किसके नाम होती है…आरसीबी की वापसी के नाम या गुजरात की नई शुरुआत के नाम.

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