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‘सही लोग ही अमेरिका आएं, यह पक्का करना है’, FIFA वर्ल्ड कप वीजा विवाद पर बोले ट्रंप

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‘सही लोग ही अमेरिका आएं, यह पक्का करना है’, FIFA वर्ल्ड कप वीजा विवाद पर बोले ट्रंप


‘सही लोग ही अमेरिका आएं, यह पक्का करना है’, FIFA वर्ल्ड कप वीजा विवाद पर बोले ट्रंप

फीफा विश्व कप 2026 के आगाज से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि ‘सही लोगों’ को टूर्नामेंट के दौरान अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिले. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के लिए आने वाले खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की यात्रा को आसान बनाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा.

टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी प्रशासनिक टीम मेहमानों की आवाजाही को सुगम बनाने पर काम कर रही है. अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के कुल 104 मैचों में से अधिकांश मुकाबले अमेरिका में खेले जाएंगे. हालांकि विश्व कप से पहले अमेरिका की इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी पॉलिसी विवादों में आ गई है.

मानवाधिकार संगठनों और फुटबॉल जगत से जुड़े कई लोगों ने खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों को वीजा देने में देरी, यात्रा प्रतिबंधों और कड़ी सुरक्षा जांच को लेकर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने भी इन मुद्दों को लेकर चिंता व्यक्त की है. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, तुर्क ने कहा कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही ‘नस्लीय भेदभाव, निगरानी और आव्रजन कानूनों के सख्त इस्तेमाल’ जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं.

जिनेवा में आयोजित एक ब्रीफिंग के दौरान तुर्क ने अमेरिका समेत कई देशों की इमिग्रेशन पॉलिसी पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई. उन्होंने उम्मीद जताई कि ये विवाद विश्व कप जैसे बड़े खेल आयोजन पर हावी नहीं होंगे. तुर्क ने कहा, ‘हमने कुछ चिंताजनक दृश्य देखे हैं. ऐसे बड़े खेल आयोजनों को खिलाड़ियों, अधिकारियों, प्रशंसकों और समाज के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराना चाहिए.’

खिलाड़ियों और अधिकारियों पर असर

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हाल के हफ्तों में सामने आई कई घटनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है. ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को एरिजोना में निर्धारित ट्रेनिंग कैम्प से हटाकर पड़ोसी देश मेक्सिको भेज दिया गया. वहीं ईरान के कुछ अधिकारियों को अमेरिका का एंट्री वीजा नहीं मिलने की भी खबरें सामने आई हैं.

अफ्रीका के प्रमुख रेफरियों में गिने जाने वाले सोमालिया के रेफरी ओमर आर्टन को भी अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कथित तौर पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के साथ संबंधों के आरोपों के कारण प्रवेश नहीं दिया गया. हालांकि इस संबंध में कोई सार्वजनिक सबूत या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई.

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें सेनेगल के एक खिलाड़ी की एयरपोर्ट पर सुरक्षा अधिकारियों द्वारा तलाशी ली जाती दिखाई दी. इस घटना को लेकर भी आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे खिलाड़ियों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार बताया. प्रशंसकों को भी अमेरिका में प्रवेश को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. मोरक्को और स्कॉटलैंड सहित कई देशों के फुटबॉल समर्थकों ने दावा किया कि उनके यात्रा दस्तावेज या वीजा रद्द कर दिए गए, जबकि वे उड़ान, होटल और मैच टिकटों पर हजारों डॉलर खर्च कर चुके थे.

फीफा पर भी उठे सवाल

इन घटनाओं के बाद फीफा भी सवालों के घेरे में आ गया है. फीफा की मेजबानी संबंधी शर्तों में कहा गया था कि विश्व कप 2026 के लिए वीजा प्रक्रिया गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से संचालित की जाएगी और साथ ही मेजबान देशों के सुरक्षा तथा इमिग्रेशन नियमों का भी सम्मान किया जाएगा. आलोचकों का कहना है कि टूर्नामेंट से पहले सामने आए कई मामले इन सिद्धांतों के विपरीत दिखाई देते हैं. फीफा ने अपने आयोजनों में संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और मानवाधिकार संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने का भी वादा किया है.

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