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राजस्थान में तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके ये 'फिल्म डायरेक्टर', एक बार तो भैरोंसिंह शेखावत तक को दे डाली शिकस्त

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राजस्थान में तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके ये 'फिल्म डायरेक्टर', एक बार तो भैरोंसिंह शेखावत तक को दे डाली शिकस्त

राजस्थान में तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके ये 'फिल्म डायरेक्टर', एक बार तो भैरोंसिंह शेखावत तक को दे डाली शिकस्त


राजस्थान में लोकसभा चुनाव का इतिहास काफी रोचक रहा है। अब तक हुए चुनाव में कई ऐसे किस्से और घटनाएं हैं जो आज भी गाहे-बगाहे जीवंत से हो उठते हैं। अब जब लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां एक बार फिर परवान पर हैं, ऐसे में इतिहास के पन्नों से कुछ रोचक किस्से-घटनाएं ‘पत्रिका’ आप तक पहुंचा रहा है।

बात आज एक ऐसे फिल्म डायरेक्टर की, जिन्होंने राजस्थान में ना सिर्फ लोकसभा चुनाव में ताल ही ठोकी, बल्कि एक के बाद एक तीन बार चुनाव जीतकर सांसद रहने की ‘हैट्रिक’ तक जमाई। एक चुनाव में तो इस चेहरे ने दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत तक को शिकस्त देने में कामयाबी पाई थी।

पहले फिल्म, फिर चुनाव
16 मई 1928 को राजस्थान के ही जोधपुर में जन्में अमृत नाहटा ने फिल्म निर्देशन के साथ-साथ राजनीति में भी भाग्य आज़माया। हालांकि इन दोनों क्षेत्रों की तुलना में उन्हें ज़्यादा कामयाबी राजनीतिक क्षेत्र में मिली, जहां वे लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद भवन तक पहुंचे।

लोकसभा चुनाव में जीत की ‘हैट्रिक’

पहला चुनाव– बाड़मेर से जीते अमृत नहाटा अपने राजनीतिक जीवन में शुरू से लेकर आखिर तक कांग्रेस में ही रहे। पहली बार कांग्रेस ने उन्हें 1967 के लोकसभा चुनाव में बाड़मेर सीट से टिकट थमाकर चुनाव मैदान में उतारा। अपने पहले ही चुनाव में जीत के साथ आगाज़ किया और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी व स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार टी सिंह को हरा दिया।

दूसरा चुनाव- बाड़मेर से जीते कांग्रेस ने वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में भी नहाटा पर दूसरी बार भरोसा जताया और उन्हें बाड़मेर सीट से ही बतौर उम्मीदवार रिपीट किया। इस बार भी वे भरोसे पर खरे उतरे और उन्होने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी व भारतीय जनसंघ से उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत को 50 हज़ार वोटों के मार्जिन से शिकस्त दी।

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तीसरा चुनाव- पाली से जीते लगातार दो बार जीत हासिल कर चुके अमृत नहाटा को वर्ष 1977 को लगातार तीसरी बार भी टिकट थमाकर उम्मीदवार बनाया। लेकिन इस बार उन्हें कांग्रेस ने बाड़मेर से नहीं, बल्कि भारतीय लोक दल ने पाली लोकसभा सीट से उतारा। बदली पार्टी और बदली सीट से चुनाव जीतना आसान नहीं था। लेकिन अमृत नाहटा को यहां से भी कामयाबी मिली और तीसरी बार उन्होंने सांसद चुनाव जीत लिया। इस चुनाव में उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार मूलचंद डागा को हराया।

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नाहटा का फ़िल्मी सफर

तीन फिल्में निर्देशित, एक रही विवादों में
अमृत नाहटा ने अपने फ़िल्मी करियर में तीन फिल्में निर्देशित कीं। इनमें से एक फिल्म 1977 में ‘किस्सा कुर्सी का’ काफी विवादों में रही। इमरजेंसी के दौरान बनाई गई इस फिल्म में कांग्रेस के सबसे चर्चित नेता इंदिरा गांधी और संजय गांधी को लेकर विवादित दृश्य शामिल थे। यही कारण रहा कि तत्कालीन सरकार ने ना सिर्फ फिल्म को बैन ही किया, बल्कि सेंसर बोर्ड से मास्टर प्रिंट लेकर उसे पूरी तरह से जलाकर नष्ट भी किया गया। इससे पहले उन्होंने 1965 में संत ज्ञानेश्वर और 1967 में रातों का राजा फिल्में निर्देशित कीं।

शिक्षाविद भी रहे नाहटा
राजनीति और फिल्मों से इतर नाहटा शिक्षाविद और अनुवादक भी रहे। अंग्रेजी से हिंदी में उनकी अनुवादित 12 पुस्तकों का प्रकाशन हुआ। नाहटा का देहांत 26 अप्रेल 2001 को नई दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में 74 वर्ष की उम्र में हुआ।

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