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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की सजा: हरदोई में पॉक्सो कोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना, कोर्ट बोली- नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य – Hardoi News

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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की सजा:  हरदोई में पॉक्सो कोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना, कोर्ट बोली- नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य – Hardoi News

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की सजा: हरदोई में पॉक्सो कोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना, कोर्ट बोली- नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य – Hardoi News


हरदोई की पॉक्सो कोर्ट ने नौ साल पुराने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट) मनमोहन सिंह की अदालत ने आरोपी रामजी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि में से 10 हजार रुपये पीड़िता को आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 2017 में दर्ज हुआ था मुकदमा अभियोजन पक्ष के अनुसार, अरवल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने जून 2017 में अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 8 जून 2017 की रात आरोपी रामजी किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि आरोपी उसे अपने बहन के गांव निजामपुर ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। कई स्थानों पर बंधक बनाकर रखने का आरोप अभियोजन के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी किशोरी को करीब 15 दिनों तक फरीदाबाद और बाद में हरदोई शहर के आजाद नगर मोहल्ले में डेढ़ महीने तक अपने कब्जे में रखे रहा। इस दौरान आरोपी द्वारा जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। पुलिस ने 24 जुलाई 2017 को किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया था। प्रेम प्रसंग और शादी की दलील कोर्ट ने खारिज की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रेम संबंध और सहमति से विवाह की दलील पेश करने का प्रयास किया। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का पीड़िता के गांव में आना-जाना था और वह परिवार से परिचित था। घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष 4 माह थी अदालत ने शैक्षणिक अभिलेखों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर माना कि घटना के समय पीड़िता की आयु 16 वर्ष 4 माह थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार नाबालिग की सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं होता। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी रामजी को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई।

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